🙏🏻 नमस्कार साथियों,
मैं हूं Guruji Sunil Chaudhary, Founder – Career Building School (formerly TAMS Studies) & JustBaazaar।
आज हम बात कर रहे हैं उस बहस की जो धीरे-धीरे हमारी युवा पीढ़ी के दिमाग में ज़हर की तरह घोली जा रही है – महात्मा फुले बनाम महर्षि दयानंद सरस्वती।
क्या वाकई फुले एक समाज सुधारक थे या सिर्फ एक विमर्शात्मक प्रयोग? चलिए, तथ्यों के आधार पर बात करते हैं।

🔶 Section 1: फुले का कथित समाज सुधार – असल में क्या था?
फुले के नाम पर स्कूल, आंदोलन और विचारधारा की बहुत बातें की जाती हैं, लेकिन जब ground reality पर बात करें:
उनके द्वारा शुरू किया गया स्कूल अनुयायियों की ही लापरवाही से बंद हो गया।
उनकी विचारधारा ईसाई और इस्लामी महिमामंडन से भरी हुई थी, जबकि हिंदू देवी-देवताओं के लिए अपशब्दों से।
👉🏼 क्या यह समाज सुधार है या संप्रदाय विशेष को pleasing करने का प्रयास?
🔶 Section 2: महर्षि दयानंद और Arya Samaj – असली राष्ट्रनिर्माण
🕉️ आर्य समाज और महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने केवल “बोलने” तक सीमित नहीं रहे, उन्होंने शिक्षा, संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और धर्म की रक्षा के लिए ज़मीन पर काम किया।
✔️ लगभग 1000 DAV Schools
✔️ 45 से अधिक Colleges
✔️ 6 प्रमुख Universities, जैसे:
DAV University, Jalandhar
Gurukul Kangri, Haridwar
MD University, Rohtak
👉🏼 ये सभी जाति-धर्म से ऊपर उठकर शिक्षा को परम धर्म मानते हैं।
🔶 Section 3: क्रांति बनाम गुलामी – कौन था असली देशभक्त?
| पहलु | महात्मा फुले | महर्षि दयानंद सरस्वती |
|---|---|---|
| क्रांतिकारी योगदान | शून्य (0%) | भगत सिंह, लाला लाजपत राय जैसे महान प्रेरणास्त्रोत |
| विचारधारा | धर्म विरोधी, हिंदू-विरोधी | वेदों पर आधारित, धर्म रक्षक |
| संस्थागत निर्माण | कोई संस्था नहीं बची | DAV, Arya Samaj, Gurukul System |
📌 फुले ने अंग्रेज़ों और इस्लामी आक्रमणकारियों की प्रशंसा की
📌 जबकि आर्य समाज ने ग़ुलामी के खिलाफ सबसे पहले बिगुल फूंका।
🔶 Section 4: आर्थिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान – कौन लाया परिवर्तन?
Arya Samaj की देन:
Hero Group – Munjal परिवार, influenced by Arya Samaj
Maruti Suzuki JV – Founders influenced by Maharshi Dayanand
PNB (Punjab National Bank) – Founded by Lala Lajpat Rai
Media Groups – Amar Ujala, etc.
इन संस्थानों ने सिर्फ आर्थिक समृद्धि नहीं दी, बल्कि Bharat ke मूल में Sanatan चेतना को भी बनाए रखा।
🔶 Section 5: जातिवादी एजेंडा और विघटन की राजनीति
आज फुले के नाम पर:
एक entire victimhood narrative फैलाया जा रहा है,
जातिवादी एजेंडे को promote किया जा रहा है,
समाज को बाँटने का खेल जारी है।
👉🏼 ये लोग बाबा साहब की भी छवि को नाच-गानों और पोस्टर वॉल पेंटिंग्स तक सीमित कर रहे हैं।
🔶 Section 6: सत्य और सनातन की विजय – आर्य समाज की रचना
सत्यार्थ प्रकाश जैसे ग्रंथ आज भी अदालतों में टकराव का विषय होते हैं, लेकिन हर बार विजयी सिद्ध होते हैं।
Arya Samaj के द्वारा:
बिना जाति पूछे शिक्षा
बिना वोटबैंक के सेवा
बिना प्रचार के निर्माण
यह सच्चा समाज सुधार है – सिर्फ बातों का नहीं, कार्य का सुधार।
🔶 Section 7: निष्कर्ष – थूक बिलोना या राष्ट्रनिर्माण?
महात्मा फुले जैसे लोगों ने समाज को सिर्फ गाली दी, विभाजन फैलाया, विक्टिमहुड बढ़ाया।
वहीं Arya Samaj ने: ✅ राष्ट्र को शिक्षा दी
✅ संस्कृति को पुनर्जीवित किया
✅ और आने वाली पीढ़ियों को दिशा दी
📣 Conclusion & CTA:
👉🏼 अब निर्णय आपका है – थूक बिलोना या समाज का निर्माण?
👉🏼 क्या आप भी समाज निर्माण में Arya Samaj जैसी ऊर्जा देखना चाहते हैं?
Speak up! Comment करिए, और इस मार्गदर्शिका को समाज में जरूर शेयर करें।
Sanatan ही Bharat की आत्मा है।
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🇮🇳 Jai Sanatan! Vande Mataram!








