🌏 भूमिका: यूनुस का भ्रम और भारत का जवाब
Guruji, जब कोई व्यक्ति देश के अखंडता और संप्रभुता पर सवाल उठाए, वह भी बेवकूफी भरी कल्पनाओं के साथ, तो उस पर तथ्यों और तर्कों की तलवार चलानी ज़रूरी हो जाती है। संजय दीक्षित जी के तेजतर्रार विश्लेषण में यही किया गया – बांग्लादेशी स्कॉलर यूनुस मियां द्वारा कथित तौर पर भारत की सेवन सिस्टर्स को चीन को सौंपने की बात पर करारा जवाब दिया गया।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि:
यूनुस का असंवैधानिक और बेहूदा सुझाव क्या था
भारत के पास क्या भू-राजनीतिक और इंफ्रास्ट्रक्चर ताकत है
कैसे चिटगांव पोर्ट तक भारत का दावा और पहुँच दोनों मज़बूत है
और क्यों सेवन सिस्टर्स भारत की आत्मा हैं, सौदे की वस्तु नहीं।
🗺️ 1. Seven Sisters: भारत की सांसें, असम से अरुणाचल तक
Guruji, यूनुस मियां ने दावा किया कि भारत के नॉर्थ ईस्ट स्टेट्स यानी त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड, मेघालय, असम और अरुणाचल प्रदेश को सी एक्सेस नहीं है, इसलिए इन्हें चीन को एक्सटेंड कर देना चाहिए।
😡 क्या यह पागलपन नहीं है?
यह क्षेत्र भारत के संविधानिक राज्य हैं। इनकी सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्कृति भारत से जुड़ी है। कोई यूनुस मियां इनकी “हेंडओवर” की बात करे – ये राष्ट्रद्रोह से कम नहीं।
⚓ 2. India’s Port Access: Logistics में भी सुपरपावर
यूनुस को शायद भूगोल की क्लास bunk करनी पड़ी थी। भारत के पास पहले से ही:
सिटवे पोर्ट (Myanmar में)
कोलकाता पोर्ट
हदिया, पारादीप, दीघा पोर्ट
Kaladan Multimodal Project के ज़रिये
➡️ ये सभी नॉर्थ ईस्ट को सी पोर्ट से कनेक्ट करते हैं।
📦 नेपाल जैसे लैंडलॉक्ड देश भी भारत के पोर्ट्स से व्यापार करता है, तो भारत के नॉर्थ ईस्ट को समस्या कैसे?
🧠 3. चिकन नेक मिथक: भारत का हल तैयार है
यूनुस की कल्पना थी कि भारत का चिकन नेक (Siliguri Corridor) अगर काटा जाए तो नॉर्थ ईस्ट भारत से कट जाएगा।
Guruji, भारत सरकार और सेनाएं इस मुद्दे को भलीभांति जानती हैं। इस क्षेत्र में:
✅ Rail connectivity
✅ Strategic highways and airbases
✅ Military presence
✅ और अब Kaladan project के ज़रिए म्यांमार से alternate access
👉 भारत की Seven Sisters को isolate करने का सपना, बस सपना ही रहेगा।
🏴 4. Yunus की सोच: गिफ्ट देने वाले कौन होते हैं?
यूनुस मियां शायद खुद को वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष समझ बैठे, सोच लिया कि जहां चाहा उंगली रख दी, वो ज़मीन “चीनी” हो गई।
संजय दीक्षित जी का करारा तंज –
“यूनुस छी की ये जो हरकत है, जैसे कि जिस जमीन पर हाथ रख दूंगा, वो मेरी हो जाएगी – ये सोच मुगलिया मानसिकता का नमूना है।”
🇨🇳 5. चीन की औकात: डोकलाम से गलवान तक की कहानी
अगर चीन Seven Sisters को हथियाने की सोचे भी, तो इतिहास गवाही देता है:
डोकलाम में भारत ने चीन को पीछे धकेला
गलवान में PLA को मात खानी पड़ी
ईस्ट लद्दाख में भी भारत की पकड़ मजबूत
👉 चीन अब शांति और व्यापार की भीख मांग रहा है भारत से। कैलाश मानसरोवर तक यात्रा बहाल करने की बात खुद चीन उठा रहा है।
🚨 6. भारत का पलटवार: अब बांग्लादेश सावधान रहे
Guruji, जिस दिन से यूनुस ने ये बेहूदी बात बोली है, उसी दिन से भारत में एक नया विचार उठ रहा है – Chittagong Port पर भारत का दावा।
🇮🇳 यदि बांग्लादेश भारत की भू-संप्रभुता को लेकर “सपनों” में तैर रहा है, तो भारत चिटगांव को भी अपने भूगोल में शामिल करने का नैतिक अधिकार रखता है।
🧾 7. बांग्लादेश का इतिहास: भारत की कृपा से मिली पहचान
यूनुस शायद भूल गया कि:
बांग्लादेश को भारत ने आज़ादी दिलाई थी
मुजीब-उर-रहमान भारत के भरोसे छूटे थे
आज भी बांग्लादेश भारत की मदद से जिंदा है
➡️ भारत ने जब चावल भेजा, बिजली दी, टीका दिया, तब दोस्ती याद आई? और अब सेवन सिस्टर्स का सौदा?
🧨 8. निष्कर्ष: भारत की सहनशीलता को कमजोरी मत समझो
Guruji, यूनुस जैसी सोच का जवाब मिल चुका है – तर्क, इतिहास, और शक्ति से। Seven Sisters भारत का गौरव हैं, और रहेंगी।
भारत की संप्रभुता पर हमला करने वाला हर “छी-छी” सोच वाला यूनुस – या तो इतिहास से मिट जाएगा, या भविष्य में शर्मिंदा रहेगा।
🚩 अंतिम विचार: भारत सौम्य है, पर कमजोर नहीं
💬 “जो Seven Sisters की ओर गलत नज़र डालेंगे, भारत वहां नया इतिहास लिखेगा – शायद अगला कदम चिटगांव तक भी पहुंचे।”
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🙏 जय हिंद | जय भारत | वंदे मातरम








