Supreme Court में फंसा Waqf Amendment Bill – लोकतंत्र बनाम भीड़तंत्र का घातक संघर्ष

🔥 भूमिका – “क़ानून संसद में बनेगा या सड़क पर?”

जय श्री राम 🙏

क्या संसद में पारित होने वाले क़ानूनों को अब अदालत या सड़क पर तय किया जाएगा?
क्या भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था अब भीड़तंत्र और चुनिंदा न्यायिक विवेक के नीचे दबती जा रही है?

👉 इसी सवाल को पूरी ताक़त से उठाया BJP सांसद निशिकांत दुबे ने और देशभर में बहस छिड़ गई।
Waqf Amendment Bill, जिसे मुस्लिम संपत्ति के बेतुके और अराजक “बाय-यूज़र” कानून को हटाने के लिए लाया गया था, अब सुप्रीम कोर्ट में अटक चुका है। और जैसे ही कोर्ट ने अपनी आपत्तियाँ दर्ज कीं, देशभर में गुस्से और निराशा की लहर दौड़ गई।


🧾 Waqf Amendment Bill क्या है?

Waqf Board लंबे समय से इस्लामिक धार्मिक संपत्तियों का प्रबंधन करता है। लेकिन इसमें बाय-यूज़र जैसा नियम था – यानी अगर कोई संपत्ति वर्षों से धार्मिक कार्यों में उपयोग हो रही है, तो बिना कागज़ के भी उसे वक़्फ़ घोषित किया जा सकता था।
⛔ इससे लाखों हिंदू संपत्तियों पर अवैध कब्ज़ा हुआ – बिना रजिस्ट्री, बिना न्याय।

👉 नया बिल कहता है:

  • हर वक़्फ़ प्रॉपर्टी का पंजीकरण (Registration) ज़रूरी है।

  • बाय यूज़र क्लॉज ख़त्म किया जाए।

  • वक़्फ़ बोर्ड में अन्य धर्मों के सदस्य भी शामिल हो सकते हैं।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट की तीन आपत्तियाँ:

  1. 📜 100 साल पुरानी प्रॉपर्टियों के रजिस्ट्रेशन पेपर कहां से लाएं?
    कोर्ट ने पूछा – क्या ऐसी संपत्तियाँ अचानक से अमान्य हो जाएंगी?

  2. 🔄 दूसरे धर्म के लोगों को वक़्फ़ बोर्ड में क्यों रखा जाए?
    कोर्ट ने आशंका जताई कि इससे “धार्मिक स्वतंत्रता” पर असर पड़ेगा।

  3. 🏛 कलेक्टर विवाद सुलझाए – ये कैसे न्यायसंगत है?
    कलेक्टर तो सरकारी अधिकारी है, उसके फ़ैसले पर पक्षपात का शक कैसे नहीं होगा?


🔥 राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और राष्ट्रवादी रोष

निशिकांत दुबे बोले – “अगर सुप्रीम कोर्ट ही हर कानून तय करेगा, तो संसद का क्या काम?”
🚪 “संसद में ताला लगा दो, वहां धर्मशाला खोल दो – कम से कम शादियों के काम तो आएगी।”

JP नड्डा ने इस बयान से पार्टी को अलग किया, लेकिन भावनाएं देश की आम जनता की थीं।
RJ Raunac जैसे पत्रकार भी बोले – “अब फैसला सड़क करेगी या संसद?”


📚 Sanatan Perspective: मंदिरों के साथ दोहरा मापदंड क्यों?

🔸 राम मंदिर मामले में हिंदुओं से कहा गया – “कागज़ दिखाओ”
🔸 वक़्फ़ में – “100 साल पुरानी प्रॉपर्टी के पेपर नहीं होंगे तो क्या?”
🔸 Supreme Court ने खुद कहा कि पुजारी का पद सेक्युलर है, तो वक़्फ़ बोर्ड सेक्युलर क्यों नहीं हो सकता?

तथ्य:

  • सबरीमाला परंपरा तोड़ी गई

  • त्रिपुरा में बलि परंपरा रोकी गई

  • राम मंदिर खुदाई के बाद मिला न्याय

  • पर मस्जिद में महिलाओं की एंट्री, हद्वानी में अतिक्रमण – अब भी पेंडिंग


🧠 वकीलों और विशेषज्ञों की राय:

विष्णु शंकर जैन और अश्विनी उपाध्याय:

  • Supreme Court ने हिंदुओं को High Court भेजा, मुस्लिम याचिकाओं पर सीधी सुनवाई क्यों?

  • अगर मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च ‘बाय यूज़र’ नहीं हो सकता, तो वक़्फ़ क्यों?

🔎 “क्या संविधान में यह लिखा है कि दो अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग न्याय हो?”


🧨 संविधान, न्यायपालिका और संप्रभुता का संकट

Vice President Jagdeep Dhankhar को बोलना पड़ा –

“How can the Supreme Court direct the President of India?”
“Only the Constitution Bench can examine constitutional validity, not the Main Bench.”

👉 सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा में बहस कर कानून पास किया, लेकिन एक झटके में उसे रोक दिया गया।


💣 जनता की नाराज़गी – Judicial Overreach?

  • RTI में High Court Judge के यहां करोड़ों कैश मिला – कोई जांच नहीं!

  • Judge की Post बदल दी गई – कोई कार्रवाई नहीं!

  • NRC, CAA, Farm Bills, Triple Talaq – सब पर या तो आंदोलन या कोर्ट स्टे

🔴 ऐसा क्यों लगता है कि एक वर्ग को सुविधा दी जा रही है और दूसरा संघर्ष कर रहा है?


🙏 Guruji Sunil Chaudhary का संदेश

🚩 जब बाय यूज़र के नाम पर मंदिरों और धर्मस्थलों की संपत्ति पर कब्ज़ा किया जाए
🚩 जब अदालतें न्याय की बजाय appeasement की लाइन पर चलें
🚩 जब संसद के कानूनों को बार-बार रोका जाए

तो Sanatan Bharat को आवाज़ उठानी होगी।

❗ हमें न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखते हुए, सवाल पूछने होंगे
❗ हमें संविधान की एक समानता की धारणा को पुनः जाग्रत करना होगा
❗ हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि “भीड़ का राज” नहीं बल्कि “संविधान का शासन” हो


📢 आपका क्या मानना है?

  • क्या Supreme Court को सभी मामलों में समान मापदंड अपनाना चाहिए?

  • क्या वक़्फ़ कानून में सुधार धर्मनिरपेक्ष भारत के लिए ज़रूरी है?

  • क्या संसद का अपमान हो रहा है?

💬 नीचे कमेंट करके ज़रूर बताएं –
👇👇👇
“समान न्याय – सभी के लिए, तुष्टिकरण – किसी के लिए नहीं!”


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📧 Email: sunil@justbaazaar.com
🌐 Jai Sanatan, Vande Mataram 🚩

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