🎵 उगह हे सूरज देव | Bhojpuri Chhath Geet (With Meaning)

आ.. आ.. आ..
👉 (यह स्वर आरंभिक भाव है, जहाँ गायक भक्ति भाव में प्रवेश करता है।)


उगह हे सूरज देव भेल भिनसरवा
🌞 उठिए हे सूर्य देव, सुबह हो गई है!
👉 भक्त सूर्य देव को जगाने की प्रार्थना कर रहा है कि प्रभु अब उगिए और अपनी किरणों से संसार को आलोकित कीजिए।


अरघ के रे बेरवा, पूजन के रे बेरवा हो
🪔 अर्घ्य देने और पूजन करने का समय आ गया है।
👉 यह पंक्ति सूर्य उपासना के उस पवित्र क्षण को दर्शाती है जब श्रद्धालु अस्त या उदय होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।


बड़की पुकारे देव, दुनु कर जोरवा
🙏 बड़ी बहन पुकार रही हैं, दोनों हाथ जोड़कर हे देवता!
👉 परिवार की बड़ी महिला श्रद्धा से हाथ जोड़कर सूर्य देव को पुकारती है — यह पारिवारिक एकता और भक्ति का प्रतीक है।


अरघ के रे बेरवा, पूजन के रे बेरवा हो
👉 फिर दोहराया गया भाव — पूजा और अर्घ्य का पावन समय आ चुका है।


बाझिन पुकारे देव, दुनु कर जोरवा
🙏 बाँझिन (संतानहीन स्त्री) भी पुकार रही है हे देव, दोनों हाथ जोड़कर!
👉 यहाँ भाव यह है कि सूर्य देव की कृपा से सबके कष्ट दूर होते हैं, संतानहीन स्त्री भी आस्था से प्रार्थना करती है।


अरघ के रे बेरवा, पूजन के रे बेरवा हो
👉 फिर से वही पवित्र क्षण — अर्घ्य और पूजा का समय।


अन्हरा पुकारे देव, दुनु कर जोरवा
🙏 अंधा (नेत्रहीन) भी पुकार रहा है हे सूर्य देव!
👉 यह पंक्ति भक्ति की समानता दर्शाती है — चाहे कोई भी अवस्था हो, हर भक्त सूर्य देव की ओर विश्वास से मुड़ता है।


अरघ के रे बेरवा, पूजन के रे बेरवा हो
👉 फिर वही क्षण — सूर्य देव की आराधना का।


आ.. आ.. आ..
👉 भक्ति की गूँज और संगीत का प्रवाह।


निर्धन पुकारे देव, दुनु कर जोरवा
🙏 गरीब भी पुकार रहा है हे देवता, दोनों हाथ जोड़कर!
👉 यह बताता है कि सूर्य देव के द्वार पर सब समान हैं — न कोई अमीर, न गरीब, सबके लिए सूर्य एक समान प्रकाश देता है।


अरघ के रे बेरवा, पूजन के रे बेरवा हो
👉 फिर वही भावना — पूजा का पावन समय।


कोढ़िया पुकारे देव, दुनु कर जोरवा
🙏 कोढ़ी (रोगी व्यक्ति) भी पुकार रहा है, हे सूर्य देव!
👉 यहाँ यह बताया गया है कि सूर्य की किरणें और उसकी कृपा सभी पीड़ितों के लिए औषधि समान हैं।


अरघ के रे बेरवा, पूजन के रे बेरवा हो
👉 फिर वही क्षण — अर्घ्य और पूजा का समय।


लंगड़ा पुकारे देव, दुनु कर जोरवा
🙏 लँगड़ा (पंगु व्यक्ति) भी पुकार रहा है हे देव!
👉 यह पंक्ति दर्शाती है कि भक्ति शरीर से नहीं, आत्मा से होती है। हर भक्त अपने भाव से जुड़ता है।


अरघ के रे बेरवा, पूजन के रे बेरवा हो
👉 फिर वही भाव — सूर्य उपासना का पावन क्षण।


उगह हे सूरज देव भेल भिनसरवा
🌞 उठिए हे सूर्य देव, भोर हो गई है!
👉 अंत में फिर वही आह्वान — कि प्रभु जगिए, संसार को प्रकाश दें, अंधकार और दुख दूर करें।


अरघ के रे बेरवा, पूजन के रे बेरवा हो
🪔 अर्घ्य देने और पूजन करने का समय आ गया है!
👉 अंतिम पंक्ति — भक्त अपने हृदय की गहराई से सूर्य देव का आह्वान करता है।


🌞 भावार्थ सारांश:

यह पूरा गीत छठ पूजा की उस अलौकिक भावना को प्रकट करता है जिसमें हर व्यक्ति — अमीर-गरीब, रोगी-संतानहीन, अंधा या लँगड़ा — सब एक समान होकर सूर्य देव के सामने खड़े होते हैं।
यह गीत बताता है कि भक्ति में कोई भेदभाव नहीं, और सूर्य की किरणें हर जीव के लिए समान रूप से जीवनदायी हैं।


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🙏 जय छठ मइया | जय सूर्य देव | जय सनातन 🌅

🌞 ‘उगह हे सूरज देव’ – शब्दार्थ सूची (Word Meanings & Explanation)

भोजपुरी शब्द / पंक्तिसरल हिंदी अर्थव्याख्या / भावार्थ
उगह हे सूरज देवउठिए हे सूर्य देवसूर्य भगवान से प्रार्थना कि अब उदय हो जाएँ और अपनी किरणों से संसार को प्रकाशमान करें।
भेल भिनसरवाभोर हो गई हैभिनसरवा यानी सुबह का समय, जब सूर्य उगने वाला होता है।
अरघ के रे बेरवाअर्घ्य देने का समयजब भक्तजन सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं।
पूजन के रे बेरवापूजा करने का समयसूर्य की उपासना, आराधना और नमन का पवित्र क्षण।
बड़की पुकारे देवबड़ी (महिला) पुकार रही है हे देवपरिवार की वरिष्ठ महिला पूजा के लिए सूर्य देव को पुकार रही है।
दुनु कर जोरवादोनों हाथ जोड़करनमस्कार मुद्रा में, श्रद्धा और भक्ति के साथ।
बाझिन पुकारे देवबाँझिन (संतानहीन स्त्री) पुकार रही हैजो निःसंतान है, वह भी प्रार्थना करती है — संतान प्राप्ति की कामना से।
अन्हरा पुकारे देवअंधा व्यक्ति पुकार रहा हैनेत्रहीन व्यक्ति भी सूर्य देव से कृपा की याचना करता है।
निर्धन पुकारे देवगरीब व्यक्ति पुकार रहा हैनिर्धन व्यक्ति भी भक्ति में लीन होकर सूर्य देव से सुख-समृद्धि माँगता है।
कोढ़िया पुकारे देवकुष्ठ रोगी पुकार रहा हैकोढ़ी व्यक्ति भी रोग मुक्ति और प्रकाश की प्रार्थना करता है।
लंगड़ा पुकारे देवलँगड़ा व्यक्ति पुकार रहा हैपंगु व्यक्ति भी सूर्य देव से शक्ति और कृपा की याचना करता है।
दुनु करदोनों हाथभक्ति में जोड़े हुए दोनों हाथ।
भिनसरवासुबह-सुबह, भोर का समयवह पावन क्षण जब सूर्य की पहली किरण धरती को छूती है।
देवभगवान, सूर्य देवयहाँ सूर्य को देवता रूप में संबोधित किया गया है।
अरघजल अर्पणजल से की जाने वाली उपासना, जिसमें सूर्य को धन्यवाद दिया जाता है।
पुकारेआवाज लगाना, विनती करनाभक्त द्वारा देवता को पुकारना या आह्वान करना।
बेरवासमय, अवसरपूजा या अर्घ्य का उपयुक्त क्षण।
भिनसरभोर, प्रभातवह समय जब रात खत्म होकर दिन आरंभ होता है।
उगहउगना, उदय होनासूर्य के उगने का भाव।
ठेकुआछठ प्रसाद का पारंपरिक पकवानगेहूं के आटे और गुड़ से बना विशेष प्रसाद।
गन्ना, मूली, केलाखेतों से प्राप्त अन्न और फलछठ प्रसाद में उपयोग किए जाने वाले शुद्ध प्राकृतिक पदार्थ।
अरघ्य देनासूर्य को जल अर्पित करनासूर्य की आराधना और आभार व्यक्त करने की मुख्य विधि।
भक्तिश्रद्धा, समर्पणईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना।
सूरज देवसूर्य भगवानऊर्जा, जीवन और प्रकाश के स्रोत के रूप में पूजनीय देवता।
भोरिया (भिनसरवा)प्रभातकालपूजा का सबसे पवित्र समय।
पुजनआराधना, भक्ति कर्मसूर्य को प्रसन्न करने का धार्मिक कार्य।
कर जोरवाहाथ जोड़नानम्रता और समर्पण का भाव दिखाना।
आ.. आ.. आ..भक्ति स्वर, तानसंगीत की वह भावनात्मक लय जो पूरे वातावरण को भक्ति से भर देती है।

💫 सांस्कृतिक व्याख्या (Cultural Understanding):

  • यह गीत केवल सूर्य की आराधना नहीं, बल्कि मानवता की समानता का प्रतीक है।

  • यहाँ हर वर्ग, हर अवस्था का व्यक्ति — चाहे निर्धन हो, रोगी हो या नेत्रहीन — सब एक समान होकर सूर्य देव को पुकारता है।

  • यह भक्ति बताती है कि प्रकाश सभी का है, सूर्य सभी का देवता है, और छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव है।


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