🔱 भूमिका
सावन का महीना हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह माह विशेष रूप से भगवान शिव की भक्ति के लिए समर्पित होता है, लेकिन इस पावन समय में तुलसी माता की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। तुलसी ना केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका आयुर्वेद में भी विशेष स्थान है।
सावन का माहिना: तुलसी पूजा का रहस्य और लाभ

🌿 तुलसी का धार्मिक महत्व
तुलसी को ‘विष्णुप्रिया’ कहा जाता है और इसे भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी का अवतार माना गया है। स्कंद पुराण, पद्म पुराण और गरुड़ पुराण में तुलसी महात्म्य का वर्णन है।
तुलसी की प्रमुख विशेषताएं:
- हरि प्रिया (भगवान विष्णु को प्रिय)
- पाप नाशिनी
- शुद्धता की प्रतीक
📖 पौराणिक कथा
एक कथा के अनुसार तुलसी माता असुर राजा जालंधर की पत्नी थीं। उनके पतिव्रता धर्म के प्रभाव से जालंधर अमर था। जब भगवान विष्णु ने उसका वध करने के लिए उसका रूप धारण कर तुलसी का धर्म भंग किया, तब तुलसी ने विष्णु को श्राप दिया और स्वयं गंगा में विलीन हो गईं।
भगवान विष्णु ने तुलसी के त्याग और भक्ति को देखते हुए उन्हें पौधे के रूप में धरती पर अवतरित होने का वरदान दिया और यह वचन दिया कि बिना तुलसी पत्र के कोई पूजा स्वीकार नहीं की जाएगी।
🌧️ सावन में तुलसी पूजा क्यों करें?
- सावन में वातावरण अधिक नमी युक्त और रोग कारक होता है। तुलसी का उपयोग रोग निवारण में सहायक होता है।
- तुलसी के पास सकारात्मक ऊर्जा होती है। सावन में शिव और विष्णु दोनों की पूजा तुलसी के साथ करने से विशेष फल मिलता है।
- यह महीना व्रत, संयम और साधना के लिए उत्तम होता है, जिसमें तुलसी पूजा मानसिक और शारीरिक शुद्धि देती है।
🙏 तुलसी पूजा विधि (Step-by-Step)
आवश्यक सामग्री:
- तुलसी का पौधा
- जल या गंगाजल
- दीपक और घी
- रोली, चावल, फूल, धूप
- तुलसी मंत्र (जैसे – “ॐ तुलस्यै नमः”)
पूजा विधि:
- प्रात: स्नान कर तुलसी के पास जाएं
- पौधे को जल चढ़ाएं
- दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें
- तुलसी माता को रोली, चावल और फूल चढ़ाएं
- तुलसी मंत्र का जाप करें
- आरती करें और प्रसाद बांटें
तुलसी पूजा में क्या न करें:
- रविवार और एकादशी को तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए
- रात्रि में तुलसी के पास दीपक नहीं बुझाएं
- बिना स्नान तुलसी को न छुएं
🧪 वैज्ञानिक लाभ
- तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल गुण होते हैं
- यह वातावरण को शुद्ध करती है और ऑक्सीजन देती है
- तुलसी का नियमित सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
- मानसून में होने वाले रोगों से बचाव करती है (जैसे सर्दी, खांसी, डेंगू)
⚠️ तुलसी से जुड़े दोष और उपाय
| दोष या भूल | उपाय |
|---|---|
| रात में तुलसी के पास अपवित्र रहना | स्नान कर अग्नि जलाएं और क्षमा मांगें |
| एकादशी को तुलसी तोड़ना | तुलसी को मन से प्रणाम करें, न तोड़ें |
| सूखे पत्ते चढ़ाना | केवल हरे व ताजे पत्ते ही चढ़ाएं |
❓ 15 प्रमुख FAQs (प्रश्नोत्तर)
- सावन में तुलसी पूजा क्यों की जाती है?
– यह माह ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक बढ़ाने वाला होता है, तुलसी इसमें सहयोगी होती है। - तुलसी किसकी पत्नी मानी जाती हैं?
– भगवान विष्णु की। - तुलसी के कौन-कौन से फायदे हैं?
– शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ। - तुलसी के पास दीपक क्यों जलाते हैं?
– यह नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है। - तुलसी को जल कब चढ़ाना चाहिए?
– प्रात:काल सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के समय। - रविवार को तुलसी क्यों नहीं तोड़नी चाहिए?
– इसे धार्मिक दृष्टि से वर्जित माना गया है। - क्या एकादशी पर तुलसी तोड़ सकते हैं?
– नहीं, यह निषेध है। पहले दिन तोड़ कर रख सकते हैं। - क्या तुलसी को गमले में रखना शुभ है?
– हाँ, पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। - तुलसी का कौन सा मंत्र जपें?
– “ॐ तुलस्यै नमः” या “ॐ हरिप्रिये नमः”। - क्या तुलसी हर रोज जल चढ़ाना चाहिए?
– हाँ, विशेषतः सावन में। - तुलसी और पीपल में क्या संबंध है?
– दोनों धार्मिक रूप से पवित्र माने जाते हैं। - क्या तुलसी पौधे को घर में रखना गलत है?
– बिल्कुल नहीं, यह अत्यंत शुभ है। - क्या तुलसी को रात्रि में छूना ठीक है?
– नहीं, यह वर्जित है। - क्या तुलसी को नमन करने से पाप कटते हैं?
– हाँ, यह शास्त्रों में कहा गया है। - क्या तुलसी का पत्ता चबाकर खाना चाहिए?
– नहीं, तुलसी को निगलना चाहिए, दाँत न लगाएं।








