🙏🏻 नमस्कार साथियों,
मैं हूं Guruji Sunil Chaudhary, Founder – Career Building School (formerly TAMS Studies) & JustBaazaar.
आज का विषय बहुत गंभीर है – भारत के सर्वोच्च न्यायालय और सरकार के बीच बढ़ता टकराव, जिसमें BJP सांसद Nishikant Dubey के तीखे बयान से Constitutional बहस छिड़ गई है।
आईए इसे विस्तार से समझते हैं।

🔹 Introduction: Why This Debate Matters?
भारत की न्यायपालिका, विशेषकर Supreme Court, लोकतंत्र का अंतिम स्तंभ मानी जाती है। लेकिन जब वही स्तंभ विवादों में आ जाए, और सत्ताधारी दल के सांसद उस पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करें, तो मामला सिर्फ बयानबाज़ी का नहीं, लोकतंत्र की बुनियाद को चुनौती देने का बन जाता है।
🔹 Section 1: Nishikant Dubey’s Explosive Statement 🔥
क्या कहा Nishikant Dubey ने?
उन्होंने Supreme Court को “धार्मिक युद्धों के लिए ज़िम्मेदार” ठहराया।
उनका कहना था:
“This country is witnessing religious wars due to Supreme Court’s judges. They keep saying ‘Show the papers’ when it comes to Hindu temples but stay silent on mosques.”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सब कुछ सुप्रीम कोर्ट तय करेगा, तो संसद का क्या मतलब?
👉🏼 बोलने की शैली उग्र थी, और इसने देश भर में एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया।
🔹 Section 2: BJP की दूरी, JP Nadda का बचाव 🛑
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP Nadda ने Nishikant Dubey के बयान से पल्ला झाड़ते हुए कहा:
“हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं।”
लेकिन सवाल यह है:
क्या पार्टी का यह रुख स्पष्टता दर्शाता है या असमंजस?
क्या पार्टी नेताओं को “free pass” है बयानबाज़ी का?
🔹 Section 3: Supreme Court का रिएक्शन ⚖️
Supreme Court खुद इस बयान से आहत है।
जस्टिस ने कहा कि:
“कोई हमें केस करने की अनुमति मांगने की ज़रूरत नहीं है।”
इसका सीधा मतलब – सुप्रीम कोर्ट खुद को निशाने पर मान रहा है।
साथ ही, Bengal हिंसा पर राष्ट्रपति शासन की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए, जस्टिस गवई ने कहा:
“हम पर पहले ही कार्यपालिका में अतिक्रमण के आरोप लग रहे हैं, हम ऐसा परामर्श नहीं दे सकते।”
🔹 Section 4: Vice President Jagdeep Dhankhar’s Warning 🚨
भारत के उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar पहले ही न्यायपालिका की सीमाओं को लेकर सवाल उठा चुके हैं:
“राष्ट्रपति और राज्यपालों को न्यायपालिका कैसे निर्देश दे सकती है?”
उनके बयान से साफ है कि देश का Constitutional balance खतरे में है।
🔹 Section 5: Congress की दोहरी नीति 😐
जब कांग्रेस कहती है कि “Supreme Court को कमजोर किया जा रहा है”, तो यह विरोधाभास साफ दिखता है।
🔸 Indira Gandhi भी सुप्रीम कोर्ट की सीमाएं तय करने की बात करती थीं।
🔸 Rahul Gandhi ने विदेशी मंचों पर भारत की संस्थाओं को कमजोर कह दिया।
अब वही पार्टी न्यायपालिका की रक्षा का झंडा उठा रही है?
🔹 Section 6: Arun Jaitley’s Historical Warning 🧠
स्व. अरुण जेटली जी ने सालों पहले चेताया था:
“Post-retirement jobs के लालच में Judges अपने फैसलों से समझौता कर सकते हैं।”
👉🏼 उन्होंने Collegium System को भी challenge किया था।
🔹 Section 7: Sanatani Critique & Rational Observation 🔱
Guruji Sunil Chaudhary की व्यक्तिगत राय:
✔️ चर्चा जरूरी है: Collegium सिस्टम, selective justice, रात में कोर्ट खोलना जैसे विषयों पर debate जरूरी है।
❌ परंतु, यह कहना कि “Supreme Court धार्मिक दंगे करवा रहा है”, शब्दों की मर्यादा का उल्लंघन है।
👉🏼 न्यायपालिका पर सवाल हो सकते हैं, लेकिन वह लोकतंत्र का अंतिम रक्षा कवच है।
🔹 Section 8: What Should Be Discussed, Not Distracted 🎯
वास्तविक सवाल:
Why was no Suo Moto action on Bengal violence?
Why no FIR against judge from whose house cash was recovered?
Why Collegium not accountable?
Why courts open at midnight for select individuals?
👉🏼 इन पर बहस होनी चाहिए – ना कि जजेस को दंगाई कहने पर।
🔹 Section 9: Final Thoughts – Safeguarding Bharat’s Democratic Dharma 🇮🇳
🙏🏼 लोकतंत्र में न्यायपालिका का स्थान सर्वोपरि है।
अगर वह कमजोर हुई, तो यह भारत की आत्मा पर चोट होगी।
सवाल उठाइए, debate कीजिए – परंतु Maryada में रहकर।
Supreme Court ने Ram Mandir का मार्ग प्रशस्त किया, Rafale में सच सामने लाया, Gujarat riots में सच्चाई का साथ दिया।
✍️ Nishikant Dubey ने ज़रूरी मुद्दा उठाया लेकिन ज़ुबान की तीव्रता ने मुद्दे को derail कर दिया।
📣 Conclusion & CTA
👉🏼 क्या आपको लगता है Supreme Court कार्यपालिका की सीमा में दखल दे रहा है?
👉🏼 क्या Nishikant Dubey की भाषा उचित थी या नहीं?
👉🏼 क्या Collegium सिस्टम को reform किया जाना चाहिए?
✍️ अपनी राय कमेंट में ज़रूर दीजिए।
जागरूक बनिए, राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को पहचानिए।
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📩 Email: sunil@justbaazaar.com
🇮🇳 Jai Sanatan! Vande Mataram!










