❖ Sexual Extramarital Affair: Consensual Relationship अब भारत में अपराध नहीं ❖

आज के बदलते समाज में, Extra-Marital Affair यानी विवाहेतर संबंध कोई अनजाना शब्द नहीं रह गया है।
कई बार, शादीशुदा लोग भी अपनी शादी से बाहर दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध बना लेते हैं।

पहले भारत में इसे एक अपराध माना जाता था – Adultery के तहत।
लेकिन Supreme Court ने Joseph Shine केस में एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए, Adultery को असंवैधानिक (Unconstitutional)घोषित कर दिया।
अब सवाल ये उठता है:
➔ क्या आज के समय में विवाहेतर संबंध बनाना कानूनन अपराध है?
➔ अगर दो शादीशुदा लोग आपसी सहमति से रिलेशनशिप में हों, तो क्या वो अपराध है?

Calcutta High Court ने हाल ही में इसपर एक बड़ा फैसला सुनाया है। आइये इसे विस्तार से समझते हैं।

Sexual Extramarital Affair Not Criminal in India


📜 भारत में Adultery का कानूनी इतिहास:

  • पहले Section 497 IPC के तहत Adultery अपराध था।

  • इसमें खासतौर पर एक शादीशुदा महिला के साथ अन्य पुरुष के संबंध को दंडनीय माना गया।

  • Supreme Court ने 2018 में Joseph Shine बनाम Union of India केस में इसे असंवैधानिक करार दिया।

  • तर्क ये दिया गया कि यह धारा महिला की स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों का उल्लंघन करती थी।

  • इसके बाद अब कोई भी विवाहेतर संबंध क्रिमिनल ऑफेंस नहीं रहा।


⚖️ Calcutta High Court का हालिया फैसला:

🏛️ मुद्दा क्या था?

एक महिला ने अपने बॉयफ्रेंड पर केस कर दिया था।
महिला का आरोप था कि:

  • वह और उसका बॉयफ्रेंड दोनों शादीशुदा थे।

  • दोनों ने दो सालों तक Extramarital Relationship में साथ बिताया।

  • बॉयफ्रेंड ने वादा किया था कि दोनों अपने-अपने पति/पत्नी को छोड़कर शादी करेंगे।

  • जब महिला के पति ने उसे छोड़ दिया और महिला ने शादी की बात की, तो बॉयफ्रेंड ने मना कर दिया।

  • महिला ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के Section 69 के तहत केस दर्ज किया।

🏛️ कोर्ट ने क्या कहा?

Calcutta High Court ने कहा:

  • यदि दो वयस्क शादीशुदा लोग अपनी मर्जी और सहमति से संबंध बनाते हैं,

  • तो यह अपराध नहीं कहा जा सकता।

  • अगर आपको पहले से पता है कि सामने वाला व्यक्ति Already Married है, फिर भी आप रिश्ते में जाते हैं,

  • तो बाद में आप इसे धोखा या अपराध का नाम नहीं दे सकते।

  • “शादी का वादा” केवल अविवाहित लोगों के बीच गंभीर माना जाता है, परन्तु शादीशुदा लोगों के मामलों में यह बात कमजोर पड़ जाती है।


🚨 कोर्ट की Observations:

✅ दो मैच्योर (Adult and Mature) लोगों ने सहमति से रिश्ता बनाया।
✅ दोनों को एक-दूसरे की मैरिटल स्टेटस की पूरी जानकारी थी।
✅ दोनों को मालूम था कि सामने वाला Already Married है।
✅ फिर भी रिलेशनशिप में जाने का मतलब है कि यह स्वेच्छा (Consent) से हुआ।
✅ इसलिए बाद में किसी भी प्रकार का आपराधिक आरोप या दंड नहीं लगाया जा सकता।


🔥 क्यों यह फैसला महत्वपूर्ण है?

🔹 समाज में विवाहेतर संबंध बढ़ते जा रहे हैं।
🔹 इससे जुड़े कई केस Emotional Manipulation या False Allegations में बदल जाते हैं।
🔹 यह फैसला न्यायपालिका द्वारा वयस्कों की संवेदनशीलता, स्वतंत्रता और जिम्मेदारी को पहचानने का एक बड़ा कदम है।
🔹 यह स्पष्ट कर देता है कि Personal Relationships को क्रिमिनलाइज करना अब संभव नहीं जब तक कि उसमें Force, Coercion या Fraud साबित न हो।


📚 Practical Guide: यदि आप ऐसी स्थिति में हों तो ध्यान रखें

 

स्थितिक्या करना चाहिए?
अगर आप शादीशुदा हैं और रिलेशन में आ रहे हैंसामने वाले की मैरिटल स्थिति के बारे में स्पष्ट रहें।
शादी के वादे पर रिलेशन बना रहे हैंध्यान दें कि शादीशुदा व्यक्ति से शादी संभवतः आसान नहीं होगी।
अगर रिश्ता बिगड़ता हैबिना भावनाओं में बहकर Legal Action लेने से पहले सोचें।
अगर आपको धोखा लगता हैसबूत और कानूनी सलाह के साथ ही कोई कदम उठाएं।
अगर Consent थाबाद में अपराध का दावा करना वैधानिक रूप से कमजोर पड़ सकता है।

📖 Guruji का दृष्टिकोण:

भारत का सनातन संस्कृति हमेशा से विवाह को एक पवित्र बंधन मानता आया है।
रामायण, महाभारत और वेदों में भी विवाह के प्रति आस्था और जिम्मेदारी पर जोर दिया गया है।
लेकिन आज का युग भौतिकतावाद और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भी प्राथमिकता दे रहा है।
इसलिए यह समझना ज़रूरी है कि
👉 जहाँ स्वतंत्रता है, वहाँ जिम्मेदारी भी है।
👉 सहमति से बने रिश्ते पवित्र हैं, लेकिन इन्हें ‘खेल’ समझना विनाशकारी है।

ध्यान रहे – चाहे कानून अनुमति दे, पर नैतिकता और धर्म हमेशा सही मार्गदर्शन करेंगे।
“कर्तव्य” को भूलना, भटकाव की ओर ले जाता है। 🚩


✨ निष्कर्ष (Conclusion):

➔ आज के भारत में, यदि दो वयस्क शादीशुदा लोग आपसी सहमति से विवाहेतर संबंध में आते हैं,
तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता।
➔ भावनाओं के उफान में बहकर बाद में आरोप-प्रत्यारोप करने से बचना चाहिए।
➔ अपने कर्मों की जिम्मेदारी लेना ही एक सच्चे, जागरूक नागरिक और सनातनी का गुण है। 🙏


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