💥 साजिद रशीदी Vs प्रेमानंद महाराज विवाद पर संपूर्ण विश्लेषण | महिलाओं पर विवादित बयानों का सनातनी दृष्टिकोण 💥

✍🏻 लेखक: गुरुजी सुनील चौधरी (Digital Success Coach, समाज और संस्कृति विश्लेषक)


🔥 प्रस्तावना

जय श्रीराम। जय सनातन। वंदे मातरम्।

आज के इस ब्लॉग में, मैं एक ऐसा विषय उठाने जा रहा हूं जो पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया, संसद, टीवी डिबेट्स और आम जनता की चर्चाओं में छाया हुआ है – मौलाना साजिद रशीदी और प्रेमानंद महाराज के महिलाओं पर दिए गए बयानों का विवाद। यह केवल दो लोगों की बात नहीं है, यह भारत की सामाजिक चेतना, चरित्र की परिभाषा, और पाखंडी सोच पर एक गहन बहस बन चुका है।

यह ब्लॉग किसी के पक्ष या विपक्ष में नहीं है। यह केवल एक सच्चे, तथ्य आधारित, संतुलित और सनातनी सोच से भरपूर विवेचन है – जैसे भारत को चाहिए, जैसे आप और मैं चाहते हैं।


🎭 भाग 1: दो चरित्र – दो दृष्टिकोण

  • मौलाना साजिद रशीदी, जो स्वयं को इस्लाम का विद्वान कहते हैं, आए दिन हिंदू प्रतीकों, मंदिरों और संस्कृति के खिलाफ बयानबाज़ी करते रहते हैं।

  • प्रेमानंद महाराज, एक सनातनी संत जिनका विवादित बयान वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि “100 में से 2-4 लड़कियाँ ही पवित्र होती हैं”।

दोनों ने महिलाओं पर बयान दिए – लेकिन क्या दोनों एक जैसे हैं? क्या दोनों के इरादे और संदर्भ समान हैं?

❗ आइए, गहराई में समझते हैं।


📍 भाग 2: साजिद रशीदी का बयान – डिंपल यादव और महिलाओं की ड्रेस पर

क्या कहा मौलाना ने?

जब डिंपल यादव मस्जिद में एक कार्यक्रम में बैठीं, उनकी कमर ज़रा सी दिख गई। बस यहीं मौलाना ने टिप्पणी कर दी – “ये इस्लाम का अपमान है।”

🚨 यह केवल एक महिला पर टिप्पणी नहीं थी, यह निम्न स्तर की निगाह और मानसिकता का प्रदर्शन था।

सवाल उठते हैं:

  1. क्या मुस्लिम धर्मगुरु महिलाओं की इज्ज़त के नाम पर सिर्फ बाहरी कपड़ों की ही चर्चा करेंगे?

  2. क्या उनके पास अखिलेश यादव से डिंपल की पॉलिटिकल नीतियों पर बात करने की क्षमता नहीं?

  3. क्या उन्होंने कभी अपने समुदाय की महिलाओं को आगे लाने की बात की?

🔥 असल मुद्दा क्या है?

इस्लामिक धर्मगुरुओं का एक वर्ग, महिलाओं को हमेशा एक वस्त्र तक सीमित कर देता है, और जब हिंदू महिलाएं सार्वजनिक रूप से आती हैं तो उनकी इज्ज़त नापने का ठेका ले लेते हैं।


📍 भाग 3: प्रेमानंद महाराज का बयान – पवित्रता बनाम पाखंड

अब आइए प्रेमानंद महाराज के बयान पर:

“100 में से 2-4 लड़कियां ही पवित्र हैं, बाकी लिव-इन में रहती हैं, बॉयफ्रेंड बनाती हैं, और चरित्र का हनन करती हैं।”

सुनते ही औरतों की एक पूरी वोकड़ी सेना, फ़ेमिनिस्ट ब्रिगेड और फ्रीडम इन सेक्सुअलिटी गैंग टूट पड़ीं महाराज पर।

लेकिन…

क्या महाराज ने झूठ कहा?

क्या आज की युवा पीढ़ी सच्चाई से भाग रही है?


💔 भाग 4: सच्चाई – आधुनिक जीवनशैली और लिव-इन कल्चर

👉 दिल्ली, नोएडा, मुंबई जैसे शहरों में गर्ल्स हॉस्टल्स के बाहर रात की कहानी सब जानते हैं।

👉 लिव-इन रिलेशनशिप्स, ओपन अफेयर्स, सेक्शुअल फ्रीडम — ये सब मीडिया और रील कल्चर के नाम पर “न्यू इंडिया” का प्रतीक बन गए हैं।

👉 क्या माता-पिता का हस्तक्षेप हटाकर एक कमरा किराए पर लेकर लड़का-लड़की का साथ रहना पवित्रता है?

👉 क्या ये महात्मा गांधी के ब्रह्मचर्य प्रयोग हैं या शरीर के बाजार की मनोरंजन मंडी?


🧠 भाग 5: पाखंड क्यों?

जो महिलाएं कहती हैं:

  • “हम अपनी लाइफ अपनी मर्जी से जिएंगे”

  • “हमें किसी बाबा की सलाह नहीं चाहिए”

वो महिलाएं भी कहती हैं:

  • “लेकिन हमें पवित्र भी कहा जाए”

  • “कोई हमारे चरित्र पर टिप्पणी न करे”

अरे बहनों! जब तुम सब कुछ मॉडर्न बना चुकी हो तो ये पवित्रता का टैग क्यों चाहिए?


📕 भाग 6: ‘Men’s Lives Matter’ पुस्तक और समाज पर संकट

गौरवशाली बात यह है कि प्रेमानंद महाराज ने पुरुषों पर हो रहे अत्याचारों को उजागर किया।

  • झूठे दहेज केस

  • झूठे रेप केस

  • लिव-इन के बाद लड़कों का फंसाया जाना

  • पत्नियों द्वारा प्रेमियों के साथ पति की हत्या

👨‍💼 यह सब अब सामान्य बात बन चुकी है। पुरुष भी अब असुरक्षित हैं।


🧭 भाग 7: क्या केवल महिलाओं की बात करना प्रगतिशील है?

यदि कोई पुरुष महिलाओं पर टिप्पणी करे = Sexist
यदि कोई महिला पुरुषों को नीचा दिखाए = Bold, Feminist

यह दोहरा मापदंड हमें किस ओर ले जा रहा है?

➡️ ना प्रेमानंद महाराज सही हैं, ना साजिद रशीदी
➡️ लेकिन दोनों के बयान अलग मंशा और अलग संदर्भ से आए हैं।


⚖️ भाग 8: मौलाना की सोच और प्रेमानंद की चेतावनी में अंतर

बिंदुसाजिद रशीदीप्रेमानंद महाराज
उद्देश्यमहिलाओं की ड्रेस पर धर्म के नाम पर टिप्पणीआधुनिक समाज को दर्पण दिखाना
शैलीव्यक्तिगत हमला, इस्लाम का राजनीतिक उपयोगचेतावनी, सामाजिक चिंता
समाधानहिजाब और पर्दासंयम और पारिवारिक संरचना
आलोचनाहमेशा हिंदू प्रतीकों और नेताओं परकेवल व्यवहारिक बदलावों पर

🔍 भाग 9: मीडिया का दोहरापन

  • साजिद रशीदी के बयान पर मीडिया चुप रहता है।

  • प्रेमानंद महाराज के बयान पर बवाल मचा देता है।

क्यों?

👉 क्योंकि TRP और एजेंडा दोनों को फेमिनिस्ट एंगल में मसाला मिल जाता है।


🎯 भाग 10: समाधान – समाज में संयम और संवाद

हमारा उद्देश्य किसी के खिलाफ नफरत फैलाना नहीं है।

🙏🏼 लेकिन यह ज़रूरी है कि:

  • महिलाएं आत्म-निरीक्षण करें – क्या आधुनिकता चरित्रहीनता का लाइसेंस है?

  • पुरुषों को भी शिक्षा मिले – महिलाओं की गरिमा को कैसे सम्मान दें?

  • धार्मिक नेताओं को संयम रखना सीखना चाहिए – चाहे वो मौलाना हों या महाराज।

  • समाज को पवित्रता, मर्यादा, और गंभीरता से रिश्तों की परिभाषा पर बात करनी होगी।


📚 निष्कर्ष: सनातन धर्म कहता है – नारी सम्मान और चरित्र दोनों महत्वपूर्ण हैं

🔔 सनातन धर्म नारी को शक्ति मानता है।
लेकिन वही धर्म संयम और मर्यादा को सर्वोपरि रखता है।

  • कोई भी महिला कपड़ों से चरित्रहीन नहीं होती – लेकिन चरित्र जीवनशैली से पता चलता है।

  • कोई भी पुरुष बाबा या मौलाना बनकर समाज की महिलाओं को अपमानित नहीं कर सकता।

  • लेकिन समाज को आईना दिखाना भी पाप नहीं है।


🙏 अंतिम संदेश – मेरी बात सुनिए, मेरी बहनों और भाइयों

👉 अगर आप महिला हैं, तो खुद से पूछिए — क्या आपको अपने जीवन को सत्य, पवित्रता और संयम से जीना चाहिए या बस रील्स और ट्रेंड्स के पीछे भागते हुए?

👉 अगर आप पुरुष हैं, तो समझिए – आपको भी अब अपनी सुरक्षा, अपने चरित्र और अधिकार के लिए बोलना होगा।

👉 और अगर आप कोई धर्मगुरु हैं – तो भाषा और मंशा में भेद समझिए।
आपका एक शब्द समाज में आग भी लगा सकता है और रोशनी भी।


🚨 एक विनती

🧵 इस ब्लॉग को हर महिला और पुरुष तक पहुँचाएं।
🕉️ सत्य सनातन वैदिक धर्म की रक्षा करना हमारा धर्म है।


📚 विशेष नोट:

📖 “Men’s Lives Matter” – यह पुस्तक हर जागरूक नागरिक को पढ़नी चाहिए।
👉 संयम, मर्यादा, और समाज की सच्चाई का उद्घाटन करती है।

📌 आप इसे प्राप्त कर सकते हैं: …..

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