🙏 जय सनातन, वंदे मातरम्
आदरणीय पाठकों,
मैं तांडव कोच सुनील गुरुजी, आज आपको लेकर चल रहा हूँ हमारे सनातन धर्म की उस पवित्र परंपरा की ओर, जो भाई-बहन के रिश्ते को अमर और अटूट बना देती है — रक्षाबंधन।
यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि प्यार, विश्वास, त्याग और सुरक्षा की हजारों साल पुरानी गाथा है।
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1️⃣ रक्षाबंधन का शाब्दिक अर्थ
“रक्षा” का मतलब है — सुरक्षा, संरक्षण, आशीर्वाद।
“बंधन” का मतलब है — बंधन, नाता, प्रेम की डोर।
दोनों मिलकर यह संदेश देते हैं —
“भाई अपनी बहन की रक्षा करेगा, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो।”
2️⃣ रक्षाबंधन का ऐतिहासिक उद्गम
रक्षाबंधन की परंपरा का ज़िक्र हमें वैदिक युग से मिलता है। यह पर्व केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं था, बल्कि गुरु-शिष्य, राजा-प्रजा, और मित्रता तक भी फैला हुआ था।
📜 वेदों और पुराणों में उल्लेख
ऋग्वेद और यजुर्वेद में रक्षा सूत्र बाँधने का विधान है, जिसे युद्ध, अनुष्ठान या पूजा के समय किया जाता था।
यह रक्षा सूत्र मंत्रों से अभिमंत्रित होता था और व्यक्ति को नकारात्मक शक्तियों से बचाने का कार्य करता था।
3️⃣ पौराणिक कथाएँ जो रक्षाबंधन को अमर बनाती हैं
🕉 3.1 इंद्र और इंद्राणी की कथा
देवताओं और दानवों के युद्ध में जब इंद्र देव असफल हो रहे थे, उनकी पत्नी इंद्राणी ने एक पवित्र धागा मंत्रों से अभिमंत्रित कर उनके हाथ पर बाँधा।
उस रक्षा सूत्र की शक्ति से इंद्र ने युद्ध जीत लिया।
➡️ यह दिखाता है कि रक्षाबंधन का मूल उद्देश्य केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि सुरक्षा और विजय का आशीर्वाद भी है।
🕉 3.2 कृष्ण और द्रौपदी की कथा
जब श्रीकृष्ण को शिशुपाल वध के समय उंगली में चोट लगी, द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बाँध दिया।
श्रीकृष्ण ने आभार में जीवन भर उसकी रक्षा करने का वचन दिया।
➡️ यही कारण है कि आज भी बहन जब भाई को राखी बांधती है, तो वह उसी संरक्षण के वचन का प्रतीक होता है।
🕉 3.3 रानी कर्णावती और हुमायूँ
मध्यकालीन इतिहास में, चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी भेजकर सहायता की गुहार लगाई, जब बहादुर शाह ने आक्रमण किया।
हुमायूँ ने उस भाई के कर्तव्य को निभाते हुए सेना लेकर चित्तौड़ की रक्षा की।
➡️ यह दिखाता है कि रक्षाबंधन धर्म, जाति, और राजनीति की सीमाओं से ऊपर है।
4️⃣ रक्षाबंधन का सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व
❤️ 4.1 भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास
यह त्योहार भाई को यह स्मरण कराता है कि उसका कर्तव्य केवल उपहार देने तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन भर बहन की रक्षा और सम्मान करना है।
🕉 4.2 आध्यात्मिक दृष्टिकोण
रक्षाबंधन आत्माओं के बीच सकारात्मक ऊर्जा का आदान-प्रदान है। राखी का धागा न केवल एक वचन है, बल्कि यह संरक्षण का यज्ञसूत्र है जो बुरी शक्तियों से बचाता है।
🤝 4.3 समाज में भाईचारे का संदेश
सनातन संस्कृति में रक्षाबंधन केवल परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव और एकता का संदेश देता है।
5️⃣ आज का रक्षाबंधन – बदलती परंपराएँ, स्थायी भावनाएँ
भले ही अब राखी बाजार में रंग-बिरंगी, डिजाइनर और डिजिटल हो गई है, लेकिन भावनाएँ वैसी ही हैं जैसी हजारों साल पहले थीं।
अब तो बहनें अपने भाइयों के साथ ही दोस्तों, गुरु, और रक्षा करने वाले किसी भी व्यक्ति को राखी बांधती हैं।
6️⃣ रक्षाबंधन कैसे मनाएँ – एक मार्गदर्शिका
📅 6.1 तिथि और मुहूर्त
शुभ तिथि: श्रावण मास की पूर्णिमा।
सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और गणेश जी की पूजा करें।
राखी बांधते समय रक्षा मंत्र का उच्चारण करें –
“येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
🪢 6.2 प्रक्रिया
पूजा की थाली में राखी, रोली, चावल, दीपक और मिठाई रखें।
भाई को तिलक करें, आरती उतारें, और राखी बाँधें।
भाई आशीर्वाद देकर बहन को उपहार दे और रक्षा का वचन दे।
7️⃣ रक्षाबंधन से मिलने वाले जीवन के सबक
वचन निभाना ही सच्चा प्रेम है।
रिश्ते केवल जन्म से नहीं, भावनाओं से बनते हैं।
सुरक्षा केवल शारीरिक नहीं, मानसिक और भावनात्मक भी होनी चाहिए।
8️⃣ समापन – रक्षाबंधन का संदेश
रक्षाबंधन हमें याद दिलाता है कि सनातन धर्म की शक्ति केवल मंदिर और शास्त्रों में नहीं, बल्कि हमारे रिश्तों, संस्कारों और वचनों में बसी है।
आज जब आप राखी बांधें, तो सिर्फ धागा न बांधें — एक वचन, एक संकल्प, एक तांडव ऊर्जा का बंधन बांधें।
🌸 तांडव कोच सुनील गुरुजी का सन्देश:
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जय सनातन 🚩, वंदे मातरम् 🇮🇳










