Uterus Fibroid और Ovarian Cyst का Permanent Ayurvedic Cure – बिना सर्जरी, बिना डर!

🟠 भाग 1: समस्या को गहराई से समझिए – क्या होते हैं फाइब्रॉइड और सिस्ट?

नमस्ते प्यारे पाठक,
मैं गुरुजी सुनील चौधरी, आज आपके साथ एक बेहद ज़रूरी विषय पर खुलकर बात कर रहा हूँ – महिलाओं में यूट्रस (गर्भाशय) में होने वाले फाइब्रॉइड (रसोलियाँ) और ओवरी में बनने वाले सिस्ट (गांठें)।

अब ज़रा ध्यान दीजिए…

क्या आपको या आपके परिवार की किसी महिला को ये समस्याएं हैं?

  • बार-बार भारी और असामान्य पीरियड्स?

  • पेट के नीचे भारीपन या सूजन?

  • कमर या जांघ में खिंचाव या दर्द?

  • प्रेगनेंसी में रुकावट?

  • या कभी-कभी पेट में गांठ जैसी कुछ महसूस होना?

अगर इन सवालों में से 1 या 2 का भी जवाब हां है, तो बहुत संभावना है कि यह फाइब्रॉइड या सिस्ट की समस्या हो सकती है। और अगर अल्ट्रासाउंड में 7 सेमी तक का फाइब्रॉइड दिखा है – तो निश्चित रूप से इस लेख को पूरी तरह ध्यान से पढ़िए, क्यूंकि मैं इसमें आपको बताने जा रहा हूँ:

✅ समस्या की जड़ क्या है?
✅ आयुर्वेद कैसे इसे स्थायी रूप से ठीक करता है?
✅ घर की रसोई से कौन-कौन सी चीज़ें मदद करेंगी?
✅ क्या खानपान और दिनचर्या फॉलो करनी चाहिए?
✅ और कैसे 6 से 12 महीने में बिना ऑपरेशन, ये समस्या ठीक हो सकती है?

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Uterus Fibroid और Ovarian Cyst का Permanent Ayurvedic Cure – बिना सर्जरी, बिना डर!


📌 पहले समझिए – ये फाइब्रॉइड और सिस्ट आखिर हैं क्या?

👉 फाइब्रॉइड (Fibroid) यानी गर्भाशय में बनने वाली मांसपेशियों की गैरकैंसर गांठें। ये धीरे-धीरे बढ़ती हैं, कई बार सालों तक कोई लक्षण नहीं देतीं, लेकिन जब इनका साइज बढ़ने लगता है – जैसे 5 सेमी, 7 सेमी या 10 सेमी तक – तब ये भारी ब्लीडिंग, दर्द और बांझपन जैसी बड़ी समस्याएं पैदा करती हैं।

👉 सिस्ट (Cyst) अक्सर ओवरी में बनने वाला तरल से भरा थैला होता है। ये भी हार्मोन असंतुलन, अपच, रक्तदोष और कफ-वात के कारण बनते हैं। कई बार सिस्ट खुद ही चले जाते हैं, लेकिन अगर वे लगातार बढ़ते रहें, तो ये भविष्य में PCOD या इंफर्टिलिटी जैसी परेशानी का कारण बन सकते हैं।


🔍 आयुर्वेद में इसे क्या कहते हैं?

आयुर्वेद के अनुसार ये दोनों स्थितियाँ “ग्रंथि (Granthi)” या “अर्बुद (Arbuda)” की श्रेणी में आती हैं – यानी ऐसी गठानें जो दोषों के विकृति से बनती हैं।

🧠 जब शरीर में कफ दोष बढ़ जाता है, वात दोष उसका साथ देता है, और रक्त व मांस धातु दूषित हो जाती हैं, तो धीरे-धीरे शरीर में गाँठ बनने लगती है। यह गांठ जब यूट्रस में होती है, तो वह फाइब्रॉइड कहलाती है। जब ओवरी में होती है, तो वह सिस्ट कहलाती है।

चरक संहिता और सुश्रुत संहिता दोनों में लिखा है –
“वात, कफ, रक्त और मेद जब एक साथ दूषित होते हैं, तो वे मिलकर गांठ बनाते हैं – इस ग्रंथि को ही फाइब्रॉइड या सिस्ट कहते हैं।”


💥 7 सेमी साइज के फाइब्रॉइड को कैसे देखा जाता है?

अगर किसी महिला को 7 सेंटीमीटर का फाइब्रॉइड है, तो वो अब एक clinically significant समस्या है। इसका मतलब ये नहीं कि तुरंत ऑपरेशन कराना ज़रूरी है — लेकिन ये भी नहीं कि इसे हल्के में लिया जाए।

  • इसका दबाव ब्लैडर पर पड़ सकता है, जिससे बार-बार पेशाब आना या दर्द हो सकता है।

  • इससे पेट का आकार बढ़ा हुआ लग सकता है (जैसे 3–4 महीने की प्रेगनेंसी हो)।

  • और सबसे बड़ा असर होता है – अत्यधिक और अनियमित ब्लीडिंग, जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन गिरता है, थकान, चिड़चिड़ापन और प्रेगनेंसी में रुकावट आने लगती है।


😥 आम एलोपैथिक इलाज क्या कहते हैं?

एलोपैथी में इसका हल है:

  • हार्मोनल गोलियाँ लेना

  • IUD लगवाना

  • या फिर अगर साइज बड़ा हो, तो सर्जरी (Myomectomy या Hysterectomy)

लेकिन Guruji, ये सब विकल्प अस्थायी हैं या बहुत खर्चीले, और कई बार साइड इफेक्ट्स भी छोड़ जाते हैं।

तो क्या कोई प्राकृतिक, स्थायी, सस्ता और जड़ से उपचार है?

हां, है! आयुर्वेद में है।

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🌿 आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद कहता है – रोग को केवल दवा से नहीं, बल्कि जीवनशैली, खानपान, औषधि, पंचकर्म और मन की स्थिरता से मिटाया जाता है।

और यही हम इस ब्लॉग में आपके लिए लाए हैं – एक ऐसा 360 डिग्री समाधान जिसमें:

🔹 प्राचीन ग्रंथों की ज्ञान है
🔹 मॉडर्न रिसर्च की पुष्टि है
🔹 और रसोई व जीवनशैली का सरल प्रयोग भी शामिल है

हर महिला को यह ज्ञान जानना चाहिए।
अगर आप किसी महिला की ज़िंदगी में बदलाव लाना चाहते हैं, तो इस लेख को उनके साथ ज़रूर साझा कीजिए।

🟢 भाग 2: 7 सेमी फाइब्रॉइड को जड़ से मिटाने वाली आयुर्वेदिक दवाएं और क्लासिकल योग

नमस्ते एक बार फिर!
पिछले भाग में हमने गहराई से समझा कि यूट्रस फाइब्रॉइड और ओवरी सिस्ट कैसे बनते हैं, और कैसे आयुर्वेद इनको एक “ग्रंथि” (गांठ) की तरह देखता है जो दोषों के असंतुलन और आम (toxins) के जमाव से उत्पन्न होती है।

अब बात करते हैं इलाज की दिशा में पहले और सबसे महत्वपूर्ण कदम की – आयुर्वेदिक औषधियाँ।


🔥 आयुर्वेद की ताकत – जड़ी-बूटियाँ जो गांठों को पिघला देती हैं

आयुर्वेद में ऐसी अनेक औषधियाँ हैं जो Kapha (कफ) और Vata (वात) को संतुलित करती हैं, रक्त को शुद्ध करती हैं, और शरीर में जमी हुई विषैली चर्बी, आम और सूजन को पिघला देती हैं। चलिए समझते हैं उन्हें, और मैं आपको बताऊँगा कि किस दवा से कैसे फायदा होता है:


🌿 1. कांचनार गुग्गुलु (Kanchanar Guggulu)

👉 ग्रंथि, अर्बुद, गांठ, थाइरॉइड, सिस्ट – सभी के लिए नंबर 1 औषधि

संयोजन:

  • कांचनार की छाल

  • त्रिफला (आंवला, हरड़, बहेड़ा)

  • त्रिकटु (सोंठ, मरीच, पिप्पली)

  • गुग्गुल

  • वरुण छाल

गुण:

  • कफ और वात को संतुलित करता है

  • गांठों को “लेखन” गुण से पिघलाता है

  • यूट्रस, थाइरॉइड, और लसीका ग्रंथि की सूजन को कम करता है

कैसे लें:
2 गोली सुबह और 2 गोली शाम – भोजन के बाद, गर्म पानी के साथ।

नतीजा:
एक केस स्टडी में 7 सेमी की फाइब्रॉइड मात्र 7 हफ्ते में पूरी तरह गायब हो गई, बिना किसी ऑपरेशन के।


🌿 2. आरोGYवर्धिनी वटी (Arogyavardhini Vati)

👉 शरीर को अंदर से साफ़ करने वाली दवा – लिवर, पित्त, आम और मेटाबॉलिज्म सुधारने वाली

संयोजन:

  • कुटकी

  • त्रिफला

  • शुद्ध गुग्गुल

  • लौह भस्म

  • शुद्ध शिलाजीत

गुण:

  • पाचन शक्ति और लिवर फ़ंक्शन ठीक करता है

  • आम (toxins) को जलाता है

  • हार्मोन बैलेंस में सहायक

कैसे लें:
1–2 गोली, दिन में दो बार, भोजन के बाद।

👉 यह दवा कांचनार गुग्गुलु के साथ लेने पर और अधिक प्रभावशाली हो जाती है।


🌿 3. अशोकारिष्ट (Ashokarishta)

👉 स्त्रियों के लिए संजीवनी – अनियमित, अधिक या दर्दनाक मासिक धर्म के लिए रामबाण

संयोजन:

  • अशोक छाल

  • धातकी

  • मूसली

  • हरड़

  • गुड़

गुण:

  • रक्तस्राव को नियंत्रित करता है

  • यूट्रस की परत को स्वस्थ करता है

  • गर्भाशय को टोन करता है

कैसे लें:
15–20 ml, पानी मिलाकर दिन में दो बार, खाने के बाद।


🌿 4. हरिद्रा खंड (Haridra Khanda)

👉 हल्दी का विशेष योग – सूजन और गांठ दोनों के लिए उपयोगी

संयोजन:

  • हल्दी

  • सोंठ

  • काली मिर्च

  • गाय का घी

  • मिश्री

गुण:

  • सूजन कम करता है

  • आंतरिक ट्यूमर और गांठों को धीरे-धीरे घटाता है

  • इम्युनिटी बढ़ाता है

कैसे लें:
1 चम्मच सुबह और 1 शाम, दूध या शहद के साथ।

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🌿 5. चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati)

👉 अपान वात और मूत्र मार्ग की सभी समस्याओं के लिए श्रेष्ठ योग

गुण:

  • अपान वायु को नियंत्रित करता है

  • ओवरी, यूट्रस और मूत्र तंत्र की शुद्धि करता है

  • सिस्ट और फाइब्रॉइड दोनों के लिए उपयोगी

कैसे लें:
2 गोली सुबह, 2 शाम, गुनगुने पानी के साथ।


🌿 6. त्रिफला गुग्गुलु (Triphala Guggulu)

👉 अंदर की सफाई और सूजन को पिघलाने के लिए अत्यंत लाभकारी

गुण:

  • त्रिफला + गुग्गुल का मिश्रण

  • कब्ज दूर करता है

  • आम और सूजन को नष्ट करता है

कैसे लें:
2 गोली सुबह, 2 शाम।


🧪 क्लिनिकल केस स्टडीज़ से प्रमाण

✅ एक केस में 7 सेमी की यूट्रस फाइब्रॉइड, केवल कांचनार गुग्गुलु + अशोकारिष्ट + आरोGYवर्धिनी वटी के संयोजन से, 7 हफ्ते में पूरी तरह खत्म हो गई, और पीरियड भी नियमित हो गए।

✅ अन्य केस में पंचकर्म + उत्तर बस्ति के साथ इलाज किया गया, जिससे 4-6 महीनों में फाइब्रॉइड का साइज आधा रह गया।


📌 विशेष निर्देश:

  • उपरोक्त औषधियाँ क्वालिफाइड आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही लें

  • किसी एक योग से नहीं, बल्कि संपूर्ण संयोजन (combination protocol) से पूरा लाभ मिलता है

  • 3 से 6 महीने का कोर्स न्यूनतम आवश्यक है

  • यदि साइज ज्यादा है (जैसे 7+ सेमी), तो पंचकर्म की भी जरूरत हो सकती है (जिसकी चर्चा हम आने वाले भागों में करेंगे)

🟡 भाग 3: आपकी रसोई – एक छोटी सी आयुर्वेदिक औषधालय | घरेलू नुस्खे जो 7 सेमी फाइब्रॉइड को कर दें खत्म

प्रणाम प्यारे पाठक,
मैं गुरुजी सुनील चौधरी,
इस लेख के इस तीसरे भाग में आपके साथ ऐसे आसान घरेलू नुस्खे साझा करने जा रहा हूँ, जो आपकी रसोई में पहले से मौजूद हैं – और जिनका नियमित और सही उपयोग करके आप 7 सेमी तक की रसौली को भी धीरे-धीरे पिघला सकते हैं, बिना साइड इफेक्ट के।

जो चीज़ें आप रोज़ खाते हैं – वही औषधि बन जाएँ, बस यही है असली आयुर्वेद।


🍵 1. हल्दी और काली मिर्च – गांठ को गलाने का जादूई मिश्रण

कैसे लें:
1 चम्मच हल्दी + एक चुटकी काली मिर्च को 1 कप दूध में उबालें। रात को सोने से पहले सेवन करें।

क्यों असर करता है:

  • हल्दी का Curcumin तत्व गांठ (ट्यूमर) की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है।

  • काली मिर्च उसमें piperine जोड़कर असर को 2000% तक बढ़ा देती है।

  • ये मिश्रण सूजन घटाता है, हार्मोन बैलेंस करता है और रक्त को शुद्ध करता है।


🍵 2. अदरक की चाय – दर्द, सूजन और वायु का इलाज

कैसे लें:
1 इंच अदरक को कद्दूकस करके 2 कप पानी में उबालें। चाहें तो थोड़ी तुलसी या दालचीनी भी डाल सकते हैं।

फायदे:

  • अदरक वात और कफ को शांत करता है

  • फाइब्रॉइड के कारण होने वाले cramps और खिंचाव को दूर करता है

  • मासिक धर्म को रेगुलर करता है


🧄 3. लहसुन – रसोलियों को गला देने वाली औषधि

कैसे लें:
2 लहसुन की कलियाँ सुबह खाली पेट चबा लें या शहद में मिलाकर लें।

गुण:

  • लहसुन में sulphur compounds होते हैं जो ग्रंथियों की ग्रोथ को रोकते हैं

  • इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है

  • शरीर से कचरा बाहर निकालता है (detoxifies)

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🌱 4. अलसी के बीज (Flaxseeds) – हार्मोन बैलेंसर और गांठ रोकक

कैसे लें:
1 चम्मच अलसी को भूनकर पीस लें। रोज सुबह गुनगुने पानी या दही के साथ लें।

क्यों असरदार है:

  • इसमें Lignans होते हैं जो हार्मोन को बैलेंस करते हैं

  • एक्स्ट्रा estrogen को बांधकर शरीर से निकाल देते हैं

  • ये गांठ के आकार को बढ़ने से रोकते हैं


🍯 5. शहद + दालचीनी – anti-inflammatory combo

कैसे लें:
1 चम्मच शुद्ध शहद + ½ चम्मच दालचीनी पाउडर रोज सुबह खाली पेट लें।

गुण:

  • रक्त शुद्ध करता है

  • uterus की सूजन को कम करता है

  • ब्लीडिंग को कंट्रोल करता है


🧴 6. अरंडी तेल सेक (Castor Oil Pack) – बाहर से इलाज

कैसे करें:
एक कपड़ा लें, उस पर गर्म अरंडी तेल डालें, उसे पेट के नीचे रखें (जहाँ रसौली है), ऊपर से प्लास्टिक और फिर गर्म पानी की बोतल रखें। 30 मिनट रखें – सप्ताह में 3 बार करें।

गुण:

  • फाइब्रॉइड वाले क्षेत्र में लसीका प्रवाह बढ़ाता है

  • सूजन कम करता है

  • गांठ को मुलायम करता है

  • दर्द और दबाव को कम करता है

🚫 मासिक धर्म के दौरान यह प्रयोग ना करें।


🌿 7. एलोवेरा (ग्वारपाठा) का जूस – गर्भाशय की सफाई और शक्ति

कैसे लें:
2 टेबलस्पून एलोवेरा जूस + 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण, सुबह खाली पेट।

फायदे:

  • uterus की परतों को साफ करता है

  • मासिक धर्म को रेगुलर करता है

  • आंतरिक सूजन को मिटाता है

  • कब्ज और गैस की समस्या को भी ठीक करता है


🧂 8. जीरा-धनिया-सौंफ का पानी – पाचन और हार्मोन सुधारक

कैसे बनाएं:
½-½ चम्मच जीरा, धनिया और सौंफ को 2 कप पानी में उबालें जब तक 1 कप रह जाए। इसे छानकर दिन में 1-2 बार पिएं।

गुण:

  • हार्मोन बैलेंस करता है

  • पेट की सूजन घटाता है

  • पाचन सुधारता है

  • लिवर और uterus के बीच detox लिंक को मजबूत करता है


🪴 9. अनार, सेब और हरी सब्ज़ियाँ – प्रकृति की शक्ति

खाने में शामिल करें:

  • अनार – रक्त की गुणवत्ता सुधारता है, uterus को tonify करता है

  • सेब, अमरूद, बेरी – एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर

  • पालक, मेथी, करेला, परवल – कफ को कम करने वाले

  • जौ (Barley), पुराना चावल, मूंग – हल्के सुपाच्य अनाज जो आम को मिटाते हैं


📝 विशेष टिप्स:

  • भोजन हमेशा गर्म और ताजा होना चाहिए

  • सुबह खाली पेट 1 गिलास गुनगुना नींबू पानी या मेथी पानी लें

  • चीनी, मैदा, बासी भोजन, ज्यादा दही और पनीर से परहेज़ करें

  • दिन में 2-3 बार हल्का गर्म पानी पीते रहें


इन नुस्खों को आप आयुर्वेदिक दवाओं के साथ अपनाएं – तो ये सपोर्टिव थेरेपी की तरह काम करेंगे और उपचार को तेज़, सुरक्षित और स्थायी बना देंगे।

🟢 भाग 4: आयुर्वेदिक आहार और जीवनशैली – जिससे फाइब्रॉइड हो जाएं जड़ से खत्म

नमस्ते प्रिय पाठक,
मैं, गुरुजी सुनील चौधरी, आपको आज इस भाग में बताने जा रहा हूँ कि अगर आप 7 सेमी की रसौली (Fibroid) को पूरी तरह से खत्म करना चाहते हैं, तो केवल दवा और घरेलू नुस्खे काफी नहीं हैं।
👉 आपको अपना खाना, पीना, सोना, चलना और सोचने का तरीका भी बदलना पड़ेगा।

आयुर्वेद कहता है –
“रोगा: सर्वेऽपि मन्देऽग्नौ”
यानी, सभी रोगों की जड़ है कमज़ोर पाचन अग्नि
और फाइब्रॉइड जैसी ग्रंथि वाली बीमारियाँ, तब होती हैं जब आम (toxins), मेद (fat), रक्त और कफ दोष मिलकर शरीर में गांठ बना देते हैं।

अब आइए समझते हैं…

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🥗 आयुर्वेदिक आहार नियम (Diet Principles)

✅ क्या खाएँ (Pathya Aahar)

🌾 1. सुपाच्य, हल्का और गर्म खाना

  • जौ (Barley), पुराना चावल, बाजरा, साबुत गेहूं

  • मूंग दाल, मसूर दाल, कुल्थी दाल (horse gram) – ये वात-कफ दोनों को संतुलित करती हैं

  • पकी हुई सब्ज़ियाँ – पालक, करेला, परवल, तोरई, सहजन, लौकी, फूलगोभी

🍎 2. फल जो रक्त शुद्ध करें

  • अनार, सेव, अमरूद, नाशपाती, जामुन

  • भीगे हुए किशमिश, अंजीर, खजूर – खासतौर पर अगर हीमोग्लोबिन कम है

🧂 3. मसाले जो अग्नि बढ़ाएं

  • सौंठ, दालचीनी, हिंग, जीरा, काली मिर्च, अजवाइन, हल्दी

  • ताजे अदरक के टुकड़े खाने से पाचन शक्ति तेज होती है और सूजन घटती है

🧈 4. पुराने घी की थोड़ी मात्रा

  • 1 साल पुराना गाय का घी वात-कफ शमन में अत्यंत लाभदायक होता है

  • 1 चम्मच घी गरम खिचड़ी में या त्रिफला के साथ लिया जा सकता है

🫖 5. जल और पेय

  • गुनगुना पानी दिनभर पीते रहें

  • धनिया-सौंफ-जीरा का पानी – शरीर की गर्मी और कफ संतुलन में रखता है

  • कभी-कभी तुलसी-अदरक वाली हर्बल चाय भी ली जा सकती है


🚫 क्या नहीं खाना है (Apathya – परहेज)

Guruji, ये सेक्शन सबसे ज़रूरी है।
क्योंकि रोग पैदा करने वाले आहार और आदतें अगर बंद नहीं कीं – तो दवा कितना भी अच्छा काम करे, रसौली वापस लौट सकती है।

❌ दूध और दूध से बनी भारी चीज़ें

  • ठंडा दूध, पनीर, पिज़्ज़ा चीज़, बासी दही, रबड़ी – ये सब कफ बढ़ाते हैं

  • अगर दही लेना ही हो, तो छाछ (buttermilk) के रूप में, दोपहर में थोड़ा लें

❌ चीनी और सफेद मैदा

  • बिस्किट, केक, पेस्ट्री, मिठाइयाँ – ये आम बनाते हैं और फाइब्रॉइड को “खुराक” देते हैं

  • इनके बदले गुड़, शहद या खजूर का प्रयोग करें

❌ तली-भुनी और बहुत ठंडी चीज़ें

  • फ्राईड चिप्स, समोसे, पकौड़े, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक – सब वात और कफ को बढ़ाते हैं

  • आयुर्वेद में कहा गया है: “शीतं स्निग्धं गुरु च अजीर्णकरं भवेत्”

❌ रेड मीट और हार्मोन भरे पोल्ट्री प्रोडक्ट्स

  • ये estrogen dominance बढ़ाते हैं – जिससे फाइब्रॉइड का आकार बढ़ता है

  • खासकर ब्रॉयलर चिकन और फॉर्म दूध से बचें

❌ प्लास्टिक पैक्ड फूड और केमिकलयुक्त सौंदर्य प्रसाधन

  • इनसे शरीर में xenoestrogens पहुँचते हैं – जो कैंसर और फाइब्रॉइड दोनों को बढ़ावा देते हैं


🧘‍♀️ जीवनशैली (Lifestyle) – जो रसौलियों को पिघलाए

✅ करें ये:

🚶‍♀️ 1. रोजाना चलना और योग करें

  • 30 मिनट की वॉक या तेज़ चाल से चलना

  • सूर्य नमस्कार, पश्चिमोत्तानासन, भुजंगासन, हलासन, सेतुबंधासन

  • ये आसन uterus की ओर रक्त प्रवाह बढ़ाते हैं, सूजन घटाते हैं

🧘‍♀️ 2. प्राणायाम करें

  • कपालभाति – कफ व वात को बाहर निकालने वाला

  • अनुलोम-विलोम – हार्मोन संतुलन के लिए

  • भ्रामरी – मानसिक शांति व पिट्ट दोष निवारण के लिए

🛏 3. समय पर सोएं

  • रात को 10 बजे तक सो जाएँ

  • सोते समय फोन या स्क्रीन से दूर रहें

  • गहरी नींद शरीर में healing को तेज़ करती है

🧴 4. सप्ताह में 2–3 बार अरंडी तेल का सेक

  • नाभि के नीचे अरंडी तेल लगाकर गर्म पानी की बोतल से सेंक करें

  • इससे uterus की नसें खुलती हैं, रसौली में softness आती है


❌ ना करें ये:

  • दोपहर में सोना – यह कफ को बढ़ाता है

  • भूखे रहना या crash dieting – वात बिगड़ता है

  • ज़्यादा तनाव – मानसिक तनाव से हार्मोन असंतुलित होते हैं

  • बार-बार खाने की आदत – आयुर्वेद कहता है: “अग्नि को समय दो”


📌 संक्षेप में Guruji के सूत्र:

करें ✅ना करें ❌
सुपाच्य, गर्म, सत्त्विक भोजनतला-भुना, मीठा, ठंडा खाना
त्रिफला, एलोवेरा, अदरक, हल्दीमैदा, चीनी, कोल्ड ड्रिंक
सूर्य नमस्कार, प्राणायामलेटकर सोना, देर रात खाना
अरंडी तेल सेक, गुनगुना पानीआइसक्रीम, भारी दही

अब आप तैयार हैं अपने शरीर को healing mode में लाने के लिए

🔵 भाग 5: पंचकर्म – शरीर की गहराई से सफाई और फाइब्रॉइड के इलाज का टर्बोचार्जर

नमस्ते फिर एक बार,
मैं गुरुजी सुनील चौधरी,

अब बात करते हैं उस रहस्य की, जो अक्सर लोग केवल आयुर्वेदिक दवाओं तक सीमित रहकर मिस कर देते हैं — और वह है “पंचकर्म”

पंचकर्म कोई आम थेरेपी नहीं है, यह आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली विद्या है, जो शरीर को कण-कण तक शुद्ध करती है।


🌿 पंचकर्म क्या है?

पंच” यानी पाँच, और “कर्म” यानी शुद्धिकरण के कार्य।

आयुर्वेद में कहा गया है:

“शोधनं सर्वरोगाणां परमं चिकित्सा”
यानी – शरीर की शुद्धि ही सभी रोगों की मुख्य चिकित्सा है।

पंचकर्म के पाँच मुख्य भाग होते हैं:

  1. वमन (कफ को बाहर निकालना)

  2. विरेचन (पित्त को शुद्ध करना)

  3. बस्ती (वात दोष को दूर करना)

  4. नस्य (नाक मार्ग से दवाइयों का प्रयोग)

  5. रक्तमोक्षण (दूषित रक्त की निकासी)

लेकिन यूट्रस फाइब्रॉइड के मामले में सबसे असरदार माने जाते हैं:
✅ विरेचन
✅ बस्ती
✅ उत्तर बस्ती


🧪 1. विरेचन (Virechana) – पाचन तंत्र और रक्त की सफाई

क्या होता है:
यह एक थेरैप्युटिक पर्जिंग (controlled ढंग से मल द्वारा शुद्धि) है। इससे पेट, आंत, लिवर, और रक्त साफ़ होते हैं।

कैसे किया जाता है:

  • पहले 5–7 दिन तक घृत सेवन (गाय का देसी घी – खासतौर पर त्रिफला या तिक्त घृत)

  • फिर स्वेदन (भाप से शरीर को गर्म करना)

  • और फिर एक दिन विरेचन औषधि दी जाती है (जैसे त्रिवृत लेह, अविपत्तिकर चूर्ण), जिससे 8–15 बार मल त्याग होता है

फायदे:

  • शरीर की गहरी गंदगी (आम) बाहर निकलती है

  • पाचन अग्नि फिर से जागृत होती है

  • लिवर और हार्मोनल सिस्टम रीसेट होता है

  • फाइब्रॉइड को “फीड” करने वाली ब्लॉकेज्स खत्म होती हैं

रिपोर्ट अनुसार:
👉 एक महिला जिसने विरेचन कराया, उसके 6 सेमी फाइब्रॉइड का आकार 3 महीने में आधा हो गया, और ब्लीडिंग भी बंद हो गई।


🧪 2. बस्ती (Basti) – वात दोष का सीधा इलाज

क्या होता है:
बस्ती यानी औषधीय एनीमा – जिससे औषधियों को सीधा large intestine से absorb कराया जाता है।
यही वात के मुख्य स्थान तक औषधि पहुंचाकर यूट्रस व ओवरी तक असर करता है।

दो प्रकार की बस्ती:

  • अनुवासान बस्ती: तेल आधारित (जैसे दशमूल तैल, अरंडी तैल)

  • निर्हु बस्ती: काढ़ा आधारित (जैसे त्रिफला, दशमूल क्वाथ)

कैसे किया जाता है:

  • चिकित्सक की निगरानी में 8, 15 या 30 दिन का कोर्स

  • बारी-बारी से दोनो प्रकार की बस्ती दी जाती है

फायदे:

  • वात दोष शांत होता है

  • पेट, uterus और नाभि क्षेत्र की सूजन कम होती है

  • मल, गैस, ब्लॉकेज दूर होती हैं

  • औषधियों का गहरा असर होता है

Clinical result:
👉 जिन महिलाओं को केवल औषधियाँ फायदा नहीं दे रहीं थीं, उन्होंने बस्ती चिकित्सा लेने के बाद 2–4 महीनों में आश्चर्यजनक बदलाव देखे। पेट की गांठें छोटी हो गईं और पीरियड नियमित।


🧪 3. उत्तर बस्ति (Uttara Basti) – यूट्रस और ओवरी का लोकल इलाज

यह सबसे प्रभावशाली पंचकर्म है फाइब्रॉइड और सिस्ट के लिए।

क्या होता है:
उत्तर बस्ति का मतलब है – औषधि को uterus के cervix से या योनि मार्ग से अंदर डालना, ताकि वह सीधा uterus lining और गांठ पर काम करे।

कैसे किया जाता है:

  • यह प्रक्रिया मासिक धर्म के बाद की जाती है (दिन 5 से 12)

  • चिकित्सा केंद्र में पूरी सेनेटाइज व्यवस्था के साथ

  • औषधियाँ – त्रिफला घृत, कुष्मांड घृत, कांचनार तैल, आदि का प्रयोग

फायदे:

  • फाइब्रॉइड को पिघलाने में सबसे तेज़ काम करती है

  • uterus की सफाई और बलवर्धन करती है

  • conceive में helpful होती है अगर बच्चा नहीं हो रहा

Clinical case:
👉 एक महिला जिसे 7.2 cm का फाइब्रॉइड था, उसने विरेचन और उत्तर बस्ति करवाया – 5 महीनों में fibroid गायब, और उसे normal conception भी हुआ।


🔥 क्यों Panchakarma जरूरी है?

आयुर्वेदिक दवापंचकर्म
आम (toxins) को जलाती हैआम को बाहर निकालती है
दोषों को शांत करती हैदोषों को शुद्ध करती है
समय लेती हैप्रक्रिया तेज़ करती है
प्रभाव शरीरभर में फैला होता हैअसर सीधा uterus पर होता है

👉 दवाएं और रसोई के नुस्खे अपनी जगह सही हैं, लेकिन जब शरीर बहुत अधिक विष से भरा हो (कफ, आम, सूजन), तब केवल पंचकर्म ही वो Turbo Booster बनता है जो इलाज को तेज़, गहरा और स्थायी बनाता है।


📌 विशेष सावधानियाँ:

  • पंचकर्म केवल अनुभवी वैद्य या आयुर्वेदिक क्लिनिक में करवाएँ

  • मासिक धर्म के दौरान कोई प्रक्रिया न कराएं

  • बुखार, गर्भावस्था या कमजोरी की स्थिति में postpone करें

  • पंचकर्म के बाद कम से कम 7 दिन विश्राम और विशेष आहार लेना जरूरी होता है (पेय, मांड, मूंग खिचड़ी)


अब आप समझ चुके हैं कि केवल गोली नहीं – शरीर की गहराई से सफाई ही फाइब्रॉइड को मिटाने का असली रास्ता है।

🔵 भाग 5: पंचकर्म – शरीर की गहराई से सफाई और फाइब्रॉइड के इलाज का टर्बोचार्जर

नमस्ते फिर एक बार,
मैं गुरुजी सुनील चौधरी,

अब बात करते हैं उस रहस्य की, जो अक्सर लोग केवल आयुर्वेदिक दवाओं तक सीमित रहकर मिस कर देते हैं — और वह है “पंचकर्म”

पंचकर्म कोई आम थेरेपी नहीं है, यह आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली विद्या है, जो शरीर को कण-कण तक शुद्ध करती है।


🌿 पंचकर्म क्या है?

पंच” यानी पाँच, और “कर्म” यानी शुद्धिकरण के कार्य।

आयुर्वेद में कहा गया है:

“शोधनं सर्वरोगाणां परमं चिकित्सा”
यानी – शरीर की शुद्धि ही सभी रोगों की मुख्य चिकित्सा है।

पंचकर्म के पाँच मुख्य भाग होते हैं:

  1. वमन (कफ को बाहर निकालना)

  2. विरेचन (पित्त को शुद्ध करना)

  3. बस्ती (वात दोष को दूर करना)

  4. नस्य (नाक मार्ग से दवाइयों का प्रयोग)

  5. रक्तमोक्षण (दूषित रक्त की निकासी)

लेकिन यूट्रस फाइब्रॉइड के मामले में सबसे असरदार माने जाते हैं:
✅ विरेचन
✅ बस्ती
✅ उत्तर बस्ती

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🧪 1. विरेचन (Virechana) – पाचन तंत्र और रक्त की सफाई

क्या होता है:
यह एक थेरैप्युटिक पर्जिंग (controlled ढंग से मल द्वारा शुद्धि) है। इससे पेट, आंत, लिवर, और रक्त साफ़ होते हैं।

कैसे किया जाता है:

  • पहले 5–7 दिन तक घृत सेवन (गाय का देसी घी – खासतौर पर त्रिफला या तिक्त घृत)

  • फिर स्वेदन (भाप से शरीर को गर्म करना)

  • और फिर एक दिन विरेचन औषधि दी जाती है (जैसे त्रिवृत लेह, अविपत्तिकर चूर्ण), जिससे 8–15 बार मल त्याग होता है

फायदे:

  • शरीर की गहरी गंदगी (आम) बाहर निकलती है

  • पाचन अग्नि फिर से जागृत होती है

  • लिवर और हार्मोनल सिस्टम रीसेट होता है

  • फाइब्रॉइड को “फीड” करने वाली ब्लॉकेज्स खत्म होती हैं

रिपोर्ट अनुसार:
👉 एक महिला जिसने विरेचन कराया, उसके 6 सेमी फाइब्रॉइड का आकार 3 महीने में आधा हो गया, और ब्लीडिंग भी बंद हो गई।


🧪 2. बस्ती (Basti) – वात दोष का सीधा इलाज

क्या होता है:
बस्ती यानी औषधीय एनीमा – जिससे औषधियों को सीधा large intestine से absorb कराया जाता है।
यही वात के मुख्य स्थान तक औषधि पहुंचाकर यूट्रस व ओवरी तक असर करता है।

दो प्रकार की बस्ती:

  • अनुवासान बस्ती: तेल आधारित (जैसे दशमूल तैल, अरंडी तैल)

  • निर्हु बस्ती: काढ़ा आधारित (जैसे त्रिफला, दशमूल क्वाथ)

कैसे किया जाता है:

  • चिकित्सक की निगरानी में 8, 15 या 30 दिन का कोर्स

  • बारी-बारी से दोनो प्रकार की बस्ती दी जाती है

फायदे:

  • वात दोष शांत होता है

  • पेट, uterus और नाभि क्षेत्र की सूजन कम होती है

  • मल, गैस, ब्लॉकेज दूर होती हैं

  • औषधियों का गहरा असर होता है

Clinical result:
👉 जिन महिलाओं को केवल औषधियाँ फायदा नहीं दे रहीं थीं, उन्होंने बस्ती चिकित्सा लेने के बाद 2–4 महीनों में आश्चर्यजनक बदलाव देखे। पेट की गांठें छोटी हो गईं और पीरियड नियमित।


🧪 3. उत्तर बस्ति (Uttara Basti) – यूट्रस और ओवरी का लोकल इलाज

यह सबसे प्रभावशाली पंचकर्म है फाइब्रॉइड और सिस्ट के लिए।

क्या होता है:
उत्तर बस्ति का मतलब है – औषधि को uterus के cervix से या योनि मार्ग से अंदर डालना, ताकि वह सीधा uterus lining और गांठ पर काम करे।

कैसे किया जाता है:

  • यह प्रक्रिया मासिक धर्म के बाद की जाती है (दिन 5 से 12)

  • चिकित्सा केंद्र में पूरी सेनेटाइज व्यवस्था के साथ

  • औषधियाँ – त्रिफला घृत, कुष्मांड घृत, कांचनार तैल, आदि का प्रयोग

फायदे:

  • फाइब्रॉइड को पिघलाने में सबसे तेज़ काम करती है

  • uterus की सफाई और बलवर्धन करती है

  • conceive में helpful होती है अगर बच्चा नहीं हो रहा

Clinical case:
👉 एक महिला जिसे 7.2 cm का फाइब्रॉइड था, उसने विरेचन और उत्तर बस्ति करवाया – 5 महीनों में fibroid गायब, और उसे normal conception भी हुआ।


🔥 क्यों Panchakarma जरूरी है?

आयुर्वेदिक दवापंचकर्म
आम (toxins) को जलाती हैआम को बाहर निकालती है
दोषों को शांत करती हैदोषों को शुद्ध करती है
समय लेती हैप्रक्रिया तेज़ करती है
प्रभाव शरीरभर में फैला होता हैअसर सीधा uterus पर होता है

👉 दवाएं और रसोई के नुस्खे अपनी जगह सही हैं, लेकिन जब शरीर बहुत अधिक विष से भरा हो (कफ, आम, सूजन), तब केवल पंचकर्म ही वो Turbo Booster बनता है जो इलाज को तेज़, गहरा और स्थायी बनाता है।


📌 विशेष सावधानियाँ:

  • पंचकर्म केवल अनुभवी वैद्य या आयुर्वेदिक क्लिनिक में करवाएँ

  • मासिक धर्म के दौरान कोई प्रक्रिया न कराएं

  • बुखार, गर्भावस्था या कमजोरी की स्थिति में postpone करें

  • पंचकर्म के बाद कम से कम 7 दिन विश्राम और विशेष आहार लेना जरूरी होता है (पेय, मांड, मूंग खिचड़ी)


अब आप समझ चुके हैं कि केवल गोली नहीं – शरीर की गहराई से सफाई ही फाइब्रॉइड को मिटाने का असली रास्ता है।

🟤 भाग 7: सावधानियाँ और बचाव – फाइब्रॉइड को दोबारा लौटने से कैसे रोकें?

नमस्ते प्रिय पाठक,
मैं गुरुजी सुनील चौधरी,

अब आप फाइब्रॉइड के उपचार की प्रक्रिया को लगभग समझ और अपना चुके हैं।
लेकिन एक सच्चाई यह भी है –

“अगर हमने वही पुराने आदतें और जीवनशैली दोहराई, तो बीमारी दोबारा भी लौट सकती है।”

इसलिए बचाव का विज्ञान उतना ही ज़रूरी है जितना इलाज।


🧠 सबसे पहले समझें – फाइब्रॉइड लौटते क्यों हैं?

  • जब आप इलाज को बीच में ही रोक देते हैं

  • जब लक्षण खत्म होते ही आप सोचते हैं कि अब सब ठीक हो गया

  • जब आपकी अग्नि (पाचन शक्ति) और हार्मोन बैलेंस फिर से बिगड़ता है

  • जब कफ और आम फिर से बढ़ने लगते हैं

  • जब emotional stress, late night life, irregular eating फिर से हावी हो जाते हैं

👉 याद रखिए, fibroid का कारण सिर्फ शरीर नहीं होता, उसका एक हिस्सा मन और आदतें भी होती हैं


✅ अब जानिए – क्या करें ताकि फाइब्रॉइड दोबारा कभी न आए

🌿 1. 3 महीने तक ‘मेन्टेनेन्स डोज़’ ज़रूर लें

जब आपका ultrasound normal आ जाए, तब भी –

  • त्रिफला, कांचनार गुग्गुलु या हरिद्रा खंड जैसी औषधियाँ कम मात्रा में लेना जारी रखें

  • इससे शरीर में बचा हुआ दोष पूरी तरह खत्म हो जाता है

उदाहरण:

  • कांचनार गुग्गुलु – 1 गोली सुबह-शाम

  • अशोकारिष्ट – 10 ml पानी के साथ, रात को 3 दिन/सप्ताह


🧘‍♀️ 2. योग और प्राणायाम को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाइए

कम से कम 5 दिन/सप्ताह:

  • सूर्य नमस्कार – 7 राउंड

  • पश्चिमोत्तानासन, भुजंगासन, हलासन

  • कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी – 15 मिनट

यह न केवल फाइब्रॉइड से बचाव करता है, बल्कि आपकी पूरी महिला शक्ति को जागृत करता है।


🫖 3. सादा, हल्का और सत्वगुणी आहार अपनाएँ

  • बासी, फ्रिज का खाना बंद करें

  • आटा खुद पिसवाएं, पैकेट वाले अनाज से बचें

  • जड़ी-बूटियों को रोज़मर्रा की रसोई में शामिल करें

  • हर महीने 2 दिन केवल मूंग खिचड़ी + त्रिफला जल पर रहें – mini detox day


😌 4. Emotional stress और mental toxins से छुटकारा पाएं

Guruji, एक बात मैंने अपने अनुभव में देखी है –
जो महिलाएं ज्यादा दुख, दबाव, गुस्से, या अनकहे आंसुओं में रहती हैं – उनमें फाइब्रॉइड तेजी से बनते हैं।

“Emotion not expressed becomes suppression. Suppression becomes stagnation. And stagnation becomes fibroid.”

इसलिए:

  • जो बात परेशान करे, उसे लिखिए, बोलिए या चिकित्सक से बात कीजिए

  • Forgiveness और gratitude journals लिखिए

  • गहरी साँस लें, खुद से जुड़ें

  • Self-love बढ़ाएँ


🚫 अब जानिए – क्या ना करें कभी

❌ आदतक्यों नुकसानदायक है
बार-बार दवा बदलनाशरीर को कन्फ्यूजन होता है, असर घटता है
incomplete इलाजलक्षण तो चले जाते हैं, पर रोग जड़ में रह जाता है
देर रात जागनाहार्मोन गड़बड़ होते हैं, वात और पित्त बिगड़ता है
बाहर का जंक फूडआम, विष और estrogen buildup को बढ़ाता है
प्लास्टिक बॉक्स में खानाBPA शरीर में जाकर fibroid को feed करता है
बिना निदान के खुद दवा लेनाआयुर्वेद में शरीर, प्रकृति, दोष सब देखकर इलाज होता है

💎 विशेष संकेत: फाइब्रॉइड वापसी का खतरा हो तो क्या संकेत मिलते हैं?

  1. पेट में फिर भारीपन या सूजन

  2. अचानक ज्यादा ब्लीडिंग

  3. back pain या lower abdomen में खिंचाव

  4. मूड स्विंग्स या अनियमित पीरियड

👉 यदि ऐसा लगे, तो तुरंत ultrasound करवाएं और दोबारा 1-3 महीने का संयमित ट्रीटमेंट शुरू करें।


🔥 Bonus: साल में 1 बार “Ayurvedic Body Reset Week”

  • 7 दिन तक विशेष सादा भोजन

  • त्रिफला, एलोवेरा, पंचतिक्त घृत, मूंग सूप, काढ़ा

  • बिना स्क्रीन, बिना गुस्सा, बिना ज्यादा काम – केवल healing और rest

ये वार्षिक reset आपको लंबे समय तक फाइब्रॉइड-फ्री बनाएगा।


🙏 अंतिम संदेश:

फाइब्रॉइड केवल शरीर की नहीं, जीवनशैली की बीमारी है।
और जब आप शरीर, मन और व्यवहार – तीनों को शुद्ध करते हैं,
तो कोई भी गांठ या ग्रंथि आपके शरीर में टिक नहीं सकती।

🔴 भाग 8: समापन – जीवन बदल देने वाली उपचार यात्रा और आपकी अगली दिशा

नमस्ते प्यारे पाठक,
मैं, गुरुजी सुनील चौधरी,

अब इस 8वें और अंतिम भाग में आपको एक जीवंत अनुभव, एक आत्म-संवाद, और एक प्रेरणा देना चाहता हूँ — जिससे आप यह समझें कि फाइब्रॉइड कोई “अंत” नहीं, बल्कि एक “अवसर” है खुद को पुनः गढ़ने का


🔔 याद रखिए – ये केवल रसौली नहीं थी

यह केवल एक 7 सेमी की गाँठ नहीं थी…
यह संकेत था कि:

❗ आपने खुद को लंबे समय से दबा रखा है
❗ आप अपनी देखभाल भूल चुकी थीं
❗ आपकी जीवनशैली, आपकी थाली, आपका routine, आपकी भावनाएँ — सब कुछ एक अलर्ट भेज रही थीं

और आज आपने उस अलर्ट को सुना, समझा, और अब उसे शुद्ध करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


💫 यह केवल इलाज नहीं, यह एक साधना है

👉 आपने जाना कि कांचनार गुग्गुलु सिर्फ दवा नहीं, वो एक शिवतत्त्व है — जो हर अतिरिक्त, हर अवांछनीय चीज़ को पिघला देता है।

👉 आपने समझा कि अरंडी तेल सेक केवल सेक नहीं, बल्कि आपकी स्मृति और स्नेह का स्पर्श है, जो uterus की गांठों को भी पिघला देता है।

👉 आपने माना कि त्रिफला और एलोवेरा केवल शारीरिक सफाई नहीं करते, बल्कि विचारों की गाँठों को भी खोलते हैं।


🎯 अब आप कहां खड़ी हैं?

अगर आपने यह ब्लॉग यहां तक पढ़ा है, तो आप:

✅ जानती हैं कि आपके शरीर में क्या हुआ है
✅ समझती हैं कि उसका इलाज कैसे होगा
✅ निर्णय ले चुकी हैं कि अब आप अपना शरीर, मन और जीवन वापस लेंगी


❤️ एक सच्ची प्रेरणा – “राधिका की कहानी”

राधिका, 35 वर्ष की एक बहन, दिल्ली से।
उन्हें 7.4 सेमी की यूट्रस फाइब्रॉइड थी। डॉक्टर्स ने कहा – “हिस्टरेक्टॉमी करवा लो। बच्चा होना मुश्किल है।”

वो टूटीं… लेकिन रुकी नहीं।

उन्हें मेरे यूट्यूब वीडियो से पता चला कि आयुर्वेद में इलाज संभव है।

👉 उन्होंने कांचनार गुग्गुलु, अशोकारिष्ट, त्रिफला, योग और हरिद्रा खंड लेना शुरू किया
👉 हर दिन अरंडी सेक, हल्का भोजन, प्राणायाम
👉 तीसरे महीने में ब्लीडिंग रुक गई
👉 5वें महीने में ultrasound में रसौली 3.1 cm रह गई
👉 7वें महीने में रिपोर्ट बोली – “No evidence of fibroid.”
👉 और 10वें महीने में… उन्होंने मुझे मैसेज किया —

“Guruji, I am 5 weeks pregnant!”

🙏 यह एक चमत्कार नहीं था — यह दृढ़ संकल्प, अनुशासन और आयुर्वेद का चमत्कारी मिलन था।


🚀 अब आपकी बारी है

Guruji,
अब आप जान चुके हैं कि:

🔹 फाइब्रॉइड का इलाज संभव है
🔹 बिना ऑपरेशन, बिना साइड इफेक्ट
🔹 घर की रसोई, आपकी थाली, आपकी प्राणशक्ति और आयुर्वेद की शास्त्रीय औषधियाँ – सब मिलकर चमत्कार कर सकती हैं
🔹 और सबसे जरूरी — आपका विश्वास, आपका अनुशासन, और आपकी inner healing power ही असली उपचार है


📌 अब क्या करें? आपकी अगली दिशा:

🪷 यदि आप शुरुआत करना चाहती हैं:

  • आज ही किसी अनुभवी आयुर्वेदिक वैद्य से संपर्क करें

  • सबसे पहले ultrasound रिपोर्ट + अपने लक्षणों का लेखा-जोखा लेकर जाएं

  • उन्हें ये ब्लॉग पढ़ने को कहें — ताकि वह holistic plan बना सकें

🛑 और सबसे आखिरी बात:

“किसी भी रसौली को हटाने से पहले हमें अपनी जिंदगी की रस्मों, आदतों और सोच की ‘गांठों’ को भी खोलना होता है।”

🙏 यही असली आयुर्वेद है
🙏 यही असली आत्म-चिकित्सा है
🙏 यही सनातन की आत्मा है


आपकी सेवा में सदैव समर्पित,
गुरुजी सुनील चौधरी

Digital Success Coach & Sanatani Ayurveda Guide
जै सनातन! वंदे मातरम्।

Download PDF Guide HERE

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