क्या बांग्लादेश में तख्तापलट होने वाला है? सेना प्रमुख की चेतावनी और बढ़ता राजनीतिक संकट

बांग्लादेश इस समय एक गंभीर राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद से देश में हिंसा, अस्थिरता और अराजकता बढ़ती जा रही है। वर्तमान में नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार कार्यरत है, लेकिन यह सरकार चुनाव कराने में विफल रही है।

अब बांग्लादेश के सेना प्रमुख वकार उजमान ने चेतावनी दी है कि अगर देश में राजनीतिक गुटबाजी और अराजकता इसी तरह जारी रही, तो बांग्लादेश की संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है। उनके इस बयान ने बांग्लादेश में संभावित सैन्य तख्तापलट (Coup d’état) की अटकलों को तेज कर दिया है। इस ब्लॉग में हम बांग्लादेश के मौजूदा राजनीतिक संकट, सेना की भूमिका, और तख्तापलट की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

Bangladesh Coup 2025? Army Chief’s Warning Explained


बांग्लादेश में संकट की शुरुआत – शेख हसीना की विदाई

1. शेख हसीना के सत्ता से हटने की पृष्ठभूमि

  • जुलाई 2024: बांग्लादेश में एंटी-रिजर्वेशन आंदोलन शुरू हुआ, जो बाद में एंटी-हसीना आंदोलन में बदल गया।
  • अगस्त 2024: सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच गुप्त समझौते की खबरें आईं।
  • 5 अगस्त 2024: जब हिंसक भीड़ शेख हसीना के घर की ओर बढ़ी, तो उन्होंने देश छोड़ने का फैसला किया और भारत आ गईं।
  • उनके जाने के बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का गठन हुआ, जिसकी बागडोर मोहम्मद यूनुस ने संभाली।

2. अंतरिम सरकार की स्थिति और विवाद

  • मोहम्मद यूनुस को “चीफ एडवाइजर” बनाया गया, लेकिन उनके नेतृत्व में सरकार चुनाव आयोजित करने में विफल रही।
  • छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक चुनाव की तारीख भी घोषित नहीं की गई है।
  • यूनुस सरकार का कहना है कि चुनाव से पहले “इलेक्टोरल रिफॉर्म्स” जरूरी हैं, ताकि वोटिंग लिस्ट को सही किया जा सके।
  • इस बीच, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), स्टूडेंट ग्रुप्स और अन्य विरोधी गुट सरकार पर जल्द चुनाव कराने का दबाव बना रहे हैं।

सेना प्रमुख की चेतावनी – क्या तख्तापलट की तैयारी हो रही है?

1. सेना प्रमुख वकार उजमान का बयान

  • 25 फरवरी 2025 को बांग्लादेश के सेना प्रमुख वकार उजमान ने एक चौंकाने वाला बयान दिया:
    • “अगर आपस में गुटबाजी और झगड़े नहीं रुके, तो बांग्लादेश की संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है।”
    • “बाद में यह मत कहना कि मैंने आपको चेतावनी नहीं दी थी।”
    • “सेना ही आम लोगों के लिए काम कर रही है, लेकिन कुछ लोग सेना के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं।”

2. सेना के गुस्से के कारण

बांग्लादेश में सेना की नाराजगी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

(i) पिलखाना नरसंहार और सेना के दोषियों की रिहाई

  • 2009 में “पिलखाना ट्रेजेडी” (BDR म्यूटन) हुई थी, जिसमें बांग्लादेश राइफल्स (BDR) के सैनिकों ने 56 सैन्य अधिकारियों और 17 नागरिकों की हत्या कर दी थी।
  • इस मामले में 152 दोषियों को फांसी और 161 को उम्रकैद हुई थी।
  • जनवरी 2025 में मोहम्मद यूनुस की सरकार ने इन दोषियों को जेल से रिहा कर दिया।
  • इससे सेना में गहरी नाराजगी है और इसे संस्थान के अपमान के रूप में देखा जा रहा है।

(ii) कॉक्स बाजार एयरफोर्स बेस पर हमला

  • 24 फरवरी 2025: कुछ स्थानीय उपद्रवियों ने कॉक्स बाजार में स्थित बांग्लादेश एयरफोर्स बेस पर हमला किया।
  • हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई और सेना को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।
  • हमले का कारण:
    • इस क्षेत्र में रोहिंग्या शरणार्थियों की मजबूत पकड़।
    • स्थानीय लोगों का कहना है कि सेना को यह जमीन छोड़ देनी चाहिए।
    • लेकिन यह बेस 2011 में शेख हसीना ने म्यांमार पर निगरानी रखने के लिए बनवाया था।
  • यह हमला संकेत देता है कि सेना के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है।

(iii) नाहिद इस्लाम का यूनुस सरकार का साथ छोड़ना

  • नाहिद इस्लाम (छात्र नेता) ने मोहम्मद यूनुस का समर्थन छोड़ दिया और नई पार्टी बनाने का संकेत दिया।
  • नाहिद इस्लाम ने ही शेख हसीना को सत्ता से हटाने में अहम भूमिका निभाई थी।
  • अब जब नाहिद खुद यूनुस सरकार से अलग हो गए हैं, तो संकेत मिलता है कि राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी।

क्या बांग्लादेश में तख्तापलट होगा? संभावित परिदृश्य

📌 तीन संभावित परिदृश्य सामने आते हैं:

1️⃣ लोकतांत्रिक समाधान:

  • अंतरिम सरकार चुनाव की तारीख तय कर दे और देश में स्थिरता बनी रहे।
  • लेकिन अब तक ऐसा होता नहीं दिख रहा है।

2️⃣ सैन्य हस्तक्षेप (Indirect Coup):

  • सेना सरकार को “बैठाकर” चुनाव की प्रक्रिया को नियंत्रित कर सकती है।
  • यह म्यांमार मॉडल की तरह हो सकता है, जहां सेना ने सीधे सत्ता नहीं ली, लेकिन हर फैसले में दखल देती है।

3️⃣ सीधा सैन्य तख्तापलट (Direct Coup):

  • अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो सेना सीधे सत्ता पर कब्जा कर सकती है।
  • बांग्लादेश में इतिहास गवाह है कि जब भी सरकारें कमजोर हुई हैं, सेना ने तख्तापलट किया है।

भारत का रुख – जयशंकर की सख्त चेतावनी

  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बांग्लादेश को साफ संदेश दिया:
    • “भारत को बांग्लादेश की अस्थिरता के लिए दोष देना बंद करो।”
    • “भारत बांग्लादेश के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा, लेकिन सीमा पर स्थिरता चाहता है।”
  • अमेरिका की भूमिका भी अहम होगी, क्योंकि ट्रंप और बाइडेन की बांग्लादेश नीति अलग-अलग रही है।

निष्कर्ष – बांग्लादेश में आगे क्या होगा?

बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है।
सेना प्रमुख की चेतावनी संकेत देती है कि तख्तापलट संभव है।
अगर चुनाव जल्द नहीं हुए, तो सेना सरकार पर नियंत्रण कर सकती है।
भारत को सतर्क रहना होगा, क्योंकि बांग्लादेश की स्थिरता क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

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