🔥 भूमिका – न्याय की आंखों पर पट्टी या पक्षपात की पगड़ी?
जय श्री राम 🚩
भारत की न्यायपालिका पर आज एक ऐसा सवाल उठ खड़ा हुआ है जो केवल एक पार्टी या एक नेता का नहीं, बल्कि 125 करोड़ हिंदुओं के मन की आवाज़ बन चुका है।
BJP सांसद निशिकांत दुबे ने Supreme Court की कार्यशैली पर प्रश्न उठाया, और BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने झटपट इससे किनारा कर लिया।
तो सवाल उठता है – कौन सही? कौन ग़लत?
🧾 निशिकांत दुबे का बयान – जनता की आवाज़ या सत्ता का अपमान?
निशिकांत दुबे ने कहा:
“जब राम मंदिर की बात आती है तो कोर्ट कागज़ मांगता है,
जब वक्फ़ की बात होती है तो कोर्ट कहता है – बेचारा मुसलमान, कागज़ कहां से लाएगा?”
यह बयान भावनात्मक भी है, तार्किक भी है, और ऐतिहासिक पीड़ा से उपजा हुआ है।
🔍 पिछले 7-8 सालों में:
वक्फ़ बोर्ड ने लाखों एकड़ जमीन बिना रजिस्ट्रेशन, केवल “बाय-यूज़र” नियम के तहत कब्जा कर ली।
1500 साल पुराने मंदिरों पर वक्फ़ दावा ठोक देता है और कोर्ट चुप रहता है।
जब हिन्दू PIL दायर करता है – कोर्ट कहता है: “Time नहीं है।”
लेकिन रात 12 बजे कोई मुस्लिम याचिका लेकर आता है – कोर्ट बेंच बैठा देता है।
❗ क्या यह न्याय है या तुष्टिकरण?
⚖️ सुप्रीम कोर्ट – संविधान का रक्षक या पक्षपात का अड्डा?
❌ राम मंदिर, काशी, मथुरा – सब पर सबूत मांगे जाते हैं।
✅ वक्फ़ की फर्जी प्रॉपर्टी – “बाय यूज़र” से स्वीकार कर ली जाती है।
👉 सुप्रीम कोर्ट का दोहरा रवैया अब खुलकर सामने आ गया है।
उदाहरण:
तमिलनाडु में 1500 साल पुरानी ज़मीन पर वक्फ़ दर्ज
हिन्दू सदस्य वक्फ़ बोर्ड में नहीं – लेकिन मुस्लिम ट्रस्टी मंदिरों में?
यह कैसा Secularism है जहां सिर्फ़ एक मज़हब के हितों की रक्षा होती है?
🔥 जेपी नड्डा का पलटवार – पार्टी लाइन से अलग या वोटबैंक से डरे?
जेपी नड्डा ने कहा:
“निशिकांत दुबे के बयान से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं।”
परंतु जनता की प्रतिक्रिया ज़बरदस्त रही –
BJP कार्यकर्ता, राष्ट्रवादी विचारक, और आम नागरिकों ने नड्डा जी के रवैये पर कड़ा विरोध जताया।
🔻 नड्डा वही हैं जिन्होंने:
नुपुर शर्मा को निलंबित किया
नवीन जिंदल को पार्टी से निकाला
टी राजा सिंह जैसे एकमात्र MLA को भी हटाया
तो अब सवाल है – BJP का राष्ट्रवाद कितना मजबूत और कितना डरपोक है?
🧠 सनातन का पक्ष – क्या अब हिंदू अपनी ही ज़मीन पर बेगाना है?
वक्फ़ बाय यूज़र = मुसलमान अगर किसी ज़मीन पर एक बार नमाज़ पढ़ ले तो वो उसकी हो जाती है
कोर्ट कहता है: “उसके पास रजिस्ट्रेशन नहीं है तो क्या हुआ, यूज़ प्रूफ है”
हिंदू कहे: “यहाँ राम जन्मभूमि है, हमारे ग्रंथों में, बौद्ध-जैन-सिख शास्त्रों में, अंग्रेजों के दस्तावेजों में सबूत हैं”
👉 फिर भी कोर्ट कहता है – “कागज़ लाओ।”
क्या यह न्याय है या भेदभाव?
📣 बयानबाज़ी से जनता ग़ुस्से में क्यों है?
न्यायालयों में अपने ही जजों के घरों में करोड़ों कैश मिले
FIR नहीं, सिर्फ़ तबादला हुआ
रेप डिफिनिशन को लेकर घिनौने निर्णय आए
कॉलेजियम के ज़रिये जज अपने रिश्तेदारों को ऊपर चढ़ाते हैं
⚠️ अब जनता पूछ रही है:
“क्या न्याय की मूर्ति ने आंखों पर पट्टी नहीं, चश्मा पहन लिया है – जो सिर्फ़ एक पक्ष को दिखता है?”
✍️ Guruji Sunil Chaudhary का सटीक संकल्प
🚩 जब हिंदुओं की ज़मीनें हड़पी जाएं
🚩 जब कोर्ट सवाल पूछने वालों को चुप कराए
🚩 जब राजनीतिक दल राष्ट्रवाद से दूर हों
तब राष्ट्र को चाहिए सत्य, साहस और स्पष्टता।
🙏 “न्याय का काम है सबके लिए बराबर रहना – अगर कोर्ट सिर्फ़ एक मज़हब की दलीलें मानता है, तो वो न्याय नहीं, वो पक्षपात है।”
📢 आपका क्या मानना है?
क्या निशिकांत दुबे का बयान गलत था या ज़रूरी?
क्या BJP को राष्ट्रवाद की लाइन फिर से खींचनी चाहिए?
क्या सुप्रीम कोर्ट अब भरोसे के काबिल है?
💬 नीचे कमेंट कीजिए, और यह पोस्ट घर-घर तक पहुँचाइए।
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🌐 Jai Sanatan, Vande Mataram 🚩








