सुप्रीम कोर्ट के गले में नई घंटी – निशिकांत दुबे के बाद अब पूर्व HC जज का प्रहार

🔥 भूमिका – “अब समय आ गया है – जुडिशरी की मर्यादा तय हो”

जय श्री राम 🚩

भारत के सुप्रीम कोर्ट पर आज इतना बड़ा संकट मंडरा रहा है, जिसे शब्दों में समेट पाना भी कठिन है।
एक ओर BJP सांसद निशिकांत दुबे के कड़े बयान, और दूसरी ओर पूर्व हाई कोर्ट जज जस्टिस राकेश कुमार का सीधा आरोप और राष्ट्रपति को लिखा पत्र – ये दोनों घटनाएं मिलकर भारत की न्यायपालिका की जवाबदेही पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही हैं।


⚖️ मामला 1 – दिल्ली HC के जज के बंगले से नोटों की बारिश

दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर मिलीं करोड़ों की नकदी की खबर ने सनसनी फैला दी।

🔍 जांच के लिए बनी 3 जजों की कमेटी (2 CJs और 1 महिला जज) ने पाया:

  • फायर ब्रिगेड और पुलिस पहले पहुंचे

  • कमरे में ₹15 से ₹50 करोड़ तक के नोट होने की आशंका

  • ये सब मिला लेकिन FIR तक नहीं हुई

👉 Supreme Court ने खुद को Article 142 के ज़रिये “FIR इम्यूनिटी” दी हुई है।
बिना संसद से पास कराए, खुद के लिए नियम, पेंशन, ड्राइवर, चपरासी – सब तय करना क्या लोकतंत्र में उचित है?


🧾 Article 142 – या Judicial Raj?

🧨 142 का इस्तेमाल कर:

  • खुद के लिए नियम बनाना

  • खुद के लिए नियुक्तियाँ करना

  • खुद की पेंशन, सुविधाएं तय करना

  • Press और President को आदेश देना

BJP नेता निशिकांत दुबे ने सवाल उठाया –
👉 “क्या सुप्रीम कोर्ट अब संविधान बनाने वाला संस्थान बन गया है?”


📩 मामला 2 – CJI चंद्रचूड़ और तीस्ता शीतलवाड़ केस पर बड़ा आरोप

पूर्व पटना HC जज जस्टिस राकेश कुमार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा।

उन्होंने लिखा:

  • तीस्ता शीतलवाड़ के केस में कोई बेंच नहीं बैठी थी

  • Court की छुट्टियाँ चल रही थीं

  • CJI जस्टिस चंद्रचूड़ एक डांस परफॉर्मेंस से निकल कर फोन पर बात करते हैं

  • फिर अचानक Bench गठित होती है, और तीस्ता को रिलीफ मिलती है – 2:1 के फैसले से

⚠️ आरोप:
“क्या ये सब प्रेशर में हुआ?”
“कौन थे वो ताक़तवर लोग जो CJI को कॉल करके बेंच बैठवा सके?”
👉 Justice Rakesh Kumar ने CBI जांच की मांग की है।


🗣 नड्डा जी का बैकफुट – BJP की छवि पर वार

BJP अध्यक्ष JP नड्डा के निशिकांत दुबे के बयान से खुद को अलग करने के प्रयास पर भारी गुस्सा दिखा:

  • नड्डा ने पहले नूपुर शर्मा को निलंबित किया

  • फिर नवीन जिंदल को बाहर निकाला

  • अब दुबे जैसे राष्ट्रवादी नेता के बयान से पल्ला झाड़ा

⚡ लेकिन इस बार जनता चुप नहीं रही।
नड्डा पर इतना गुस्सा फूटा, जितना शायद नूपुर शर्मा के समय भी नहीं हुआ था।


🛑 क्या प्रेसिडेंट कोई कदम उठाएंगी?

राष्ट्रपति को सीधे पत्र लिखा गया है।
CBI जांच की मांग की गई है।
लेकिन सवाल उठता है – क्या वर्तमान सरकार जुडिशरी के इस शक्तिविस्तार को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी?

सूत्रों के अनुसार:

  • पिछले कुछ दिनों से लगातार मीटिंग्स चल रही हैं

  • सरकार कोई संवैधानिक लाइन ड्रॉ करने की तैयारी में है

  • यह संदेश देने की तैयारी है कि “जुडिशरी की सीमा यहीं तक है”


🧠 Sanatan Bharat का सवाल – क्या न्याय अब न्याय जैसा है?

यह मामला अब सिर्फ लॉ का नहीं, बल्कि राष्ट्र के संतुलन का है।
अगर सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठने लगे, अगर खुद जज एक-दूसरे पर शक करने लगें,
तो आम जनता किस न्याय की उम्मीद करे?


🕉 Guruji Sunil Chaudhary का संदेश:

🚩 यह कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है।
🚩 यह संविधान की गरिमा बनाम न्यायिक अहंकार की लड़ाई है।
🚩 भारत को एक नई संवैधानिक मर्यादा रेखा खींचनी होगी।

हम सबको, संविधान का सम्मान करते हुए, संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका की सीमाओं का पालन करवाना होगा।
वरना ये “कोर्ट क्रेसी” भारत के लोकतंत्र को खोखला कर देगी।


💬 आपकी राय जरूरी है!

  • क्या Supreme Court को अपनी शक्ति सीमित करनी चाहिए?

  • क्या Article 142 का दुरुपयोग हो रहा है?

  • क्या न्यायपालिका अब निष्पक्ष नहीं रह गई?

📢 कमेंट करके अपनी राष्ट्रवादी आवाज़ बुलंद करें!


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📧 Email: sunil@justbaazaar.com
🌐 Jai Sanatan, Vande Mataram 🚩

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