Muslim – Hindu: Two Different Humans? | A Deep Dive into Historical Roots, Ideology, and National Unity

Muslim Hindu Two Humans – Truth Behind Divide

🔥 भूमिका: क्या सच में मुसलमान और हिंदू दो अलग इंसान हैं?

नमस्कार साथियों,
🙏 जय श्री राम, वंदे मातरम् और सत्यमेव जयते के साथ इस लेख की शुरुआत करते हैं। हाल ही में एक वीडियो बहुत वायरल हो रहा है – जिसमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर यह कहते नज़र आते हैं कि “We are different from Hindus in every aspect of life.”
यह कोई नया बयान नहीं है, बल्कि एक बहुत पुरानी सोच की रीपैकेजिंग है, जो आज के मुसलमानों को भ्रमित करने के लिए बार-बार इस्तेमाल की जाती है।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि:

  • इस सोच की जड़ें कहां हैं?

  • Sir Syed Ahmed Khan और उनकी AMU ideology क्या कहती थी?

  • Shayari के पीछे छुपा आइडियोलॉजिकल ज़हर क्या है?

  • क्यों हर भारतवासी को यह इतिहास जानना चाहिए?

Muslim – Hindu: Two Different Humans? | A Deep Dive into Historical Roots, Ideology, and National Unity Sir Syed Ahmad Khan Aligarh Muslim University

 


🧠 Aseem Munir का बयान: सिर्फ एक सैनिक का भाषण नहीं, एक सोच का बयान

असीम मुनीर कहते हैं:

“Our forefathers thought that we are different from Hindus in every possible aspect – our religion, our customs, our traditions, our ambitions…”

यह कथन दरअसल ‘Two Nation Theory’ का मूल है, जो पाकिस्तान की नींव में डाली गई थी। यह वही विचारधारा है जो Sir Syed Ahmed Khan ने ब्रिटिश भारत में बोई थी – कि हिंदू और मुस्लिम कभी एक राष्ट्र नहीं हो सकते।

Video


📚 Sir Syed Ahmed Khan: ‘द एजुकेशन मसीहा’ या ‘Two Nation Theory के जनक’?

Sir Syed Ahmed Khan को बहुत से लोग भारत में शिक्षा का अग्रदूत मानते हैं, लेकिन उनके भाषण, पत्र और दृष्टिकोण इस बात की गवाही देते हैं कि उन्होंने ही सबसे पहले हिन्दुओं और मुसलमानों को अलग-अलग राष्ट्र बताया था।

🔍 उनके कुछ कथन:

यह दृष्टिकोण 1876 से लेकर 1888 तक उनके कई भाषणों में मौजूद था। उनके मुताबिक अगर उर्दू को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी और हिंदुओं की भाषा हिंदी को प्रमुखता मिलेगी तो देश में कभी एकता नहीं होगी।

👉 गौर कीजिए, यह सब उस दौर में कहा जा रहा था जब सावरकर, हेडगेवार और गोलवलकर जी जैसे हिंदुत्व विचारक पैदा भी नहीं हुए थे।


🧨 बंटवारे की ज़मीन: जनसंघ नहीं, Sir Syed की विचारधारा

हमारे यहां अक्सर यह कहा जाता है कि बंटवारा जनसंघ या हिंदू राष्ट्रवादियों की वजह से हुआ। लेकिन सच्चाई यह है कि जब हिंदुत्व के नेता पैदा भी नहीं हुए थे, Sir Syed जैसे बुद्धिजीवी यह तय कर चुके थे कि हम एक साथ नहीं रह सकते।

🔁 यही बात आज असीम मुनीर दुहरा रहा है। जब पाकिस्तान अस्थिर होता है, तब यही बयानबाज़ी बाहर आती है ताकि जनता का ध्यान बुनियादी मुद्दों से हटाया जा सके।


🧪 Shayari में छुपा आइडियोलॉजिकल ज़हर

बहुत बार हम Mirza Ghalib, Iqbal और Faraz जैसे शायरों की शायरी पर वाहवाही करते हैं, बिना यह समझे कि उनमें छुपा पैगाम क्या है।

🎭 उदाहरण:

  • ग़ालिब: “ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठकर, या मुझे वो जगह बता जहां ख़ुदा ना हो!”

  • इक़बाल: “मस्जिद ख़ुदा का घर है, शराब पीने की जगह नहीं, पीनी है तो काफ़िर के दिल में पी, वहां ख़ुदा नहीं।”

  • फराज़: “काफ़िर के दिल से आया है फराज़, वहां भी ख़ुदा है, पर काफ़िर को पता नहीं।”

👉 यहां काफ़िर = हिंदू दर्शाया जा रहा है, और उसे “बिना खुदा का” यानी नीच और तुच्छ दिखाया जा रहा है।


🧭 आज की सच्चाई और हमारी ज़िम्मेदारी

आज भारत में रहने वाला हर मुसलमान क्या इस सोच को मानता है? बिल्कुल नहीं।
परंतु यह ज़रूरी है कि इतिहास की इन बातों को समझा जाए, ताकि हम यह तय कर सकें कि हमारी एकता के दुश्मन कौन हैं।

🔔 जो लोग secularism की नकाब पहनकर Sir Syed Ahmed की विचारधारा को महिमामंडित करते हैं, वे खुद भ्रमित हैं या जानबूझकर यह भ्रम फैला रहे हैं।


🧵 निष्कर्ष: एक राष्ट्र, एक पहचान – भारत

भारत की आत्मा सनातन है। यहां जितने भी मत, पंथ, समुदाय हैं – सब इसी विशाल संस्कृति के अंग हैं।
जो सोच कहती है कि “हम अलग हैं,” वो भारत की एकता पर हमला करती है।

हमारा फर्ज़ है कि हम इन विचारों को पहचाने, उजागर करें, और भावी पीढ़ी को सच्चाई से अवगत कराएं।


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🇮🇳 जय सनातन! वंदे मातरम्!

Sir Syed Ahmad Khan का नाम भारत के इतिहास में एक बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में लिया जाता है। जहाँ एक ओर उन्हें “मसीहा ऑफ एजुकेशन” कहा गया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने ऐसी कई बातें कही हैं जो भारत की एकता के लिए घातक विचारधारा की नींव रखती हैं। आज जो Two Nation Theory है, उसकी बुनियाद Sir Syed Ahmad Khan के विचारों में बहुत पहले से देखी जा सकती है।

यहाँ पर Sir Syed Ahmad Khan के कुछ मुख्य और ऐतिहासिक डायलॉग्स (Quotes/Speeches/Letters) को संकलित किया गया है, जो असली सोच को उजागर करते हैं – without political correctness, with full clarity:


🔥 Sir Syed Ahmad Khan के मुख्य विचार और डायलॉग्स

🧨 1. “Hindus and Muslims are two distinct nations.”

“India is not one nation. It is a continent of different nations.”
➡ यह बात Sir Syed ने बार-बार कही कि हिंदू और मुसलमान अलग-अलग कौमें हैं और एक Nation नहीं बन सकते।


🧨 2. “Muslims should stay away from Indian National Congress.”

➡ Sir Syed ने अपने पत्रों में कहा कि मुसलमानों को Indian National Congress से दूर रहना चाहिए क्योंकि यह हिंदुओं का डोमिनेशन है।


🧨 3. “Two thrones cannot be placed on one elephant.”

➡ जब तैयब जी जैसे मुसलमान कांग्रेस जॉइन कर रहे थे, तो Sir Syed ने यह कहकर विरोध किया कि एक भारत में दो ताक़तें नहीं रह सकतीं।


🧨 4. “If Hindus are given prominence, Muslims will lose identity.”

➡ Sir Syed ने 1888 के अपने एक भाषण में कहा था कि अगर इस देश में हिंदी को प्रमुखता दी जाएगी और उर्दू को हटा दिया जाएगा तो मुसलमान अपने अस्तित्व की लड़ाई में हार जाएंगे।


🧨 5. “Mohammedan India and Hindu India are two different Indias.”

➡ Sir Syed ने बार-बार भारत को दो हिस्सों में बाँट कर देखा – Mohammedan India और Hindu India, और इसे प्राकृतिक विभाजन बताया।


🧨 6. “There are more similarities between pigs and men than between Hindus and Muslims.”

➡ एक और बहुत विवादास्पद कथन में, Sir Syed ने कहा कि “अगर कोई मुसलमान और हिंदू के बीच समानताएं ढूंढता है तो वो ऐसे ही है जैसे कोई इंसान और सुअर दोनों मैमल हैं यह कहकर उन्हें एक जैसा मान ले।”


🧨 7. “If Urdu is not given prominence, Hindu-Muslim unity is impossible.”

➡ Sir Syed ने उर्दू को मुसलमानों की पहचान बताया और कहा कि अगर इसे राष्ट्रीय भाषा नहीं माना गया तो एकता असंभव है।


🧠 Contextual Insight from Guruji:

👉 ये विचार आज के Aseem Munir जैसे नेताओं की बातों में भी दिखाई देते हैं।
👉 Sir Syed के विचारों ने ही बाद में Muslim League की नींव रखी, जिसने Partition of India की राह खोली।
👉 ये सब विचार उस दौर के हैं जब सावरकर, हेडगेवार, और गोलवलकर जी पैदा भी नहीं हुए थे — इससे स्पष्ट होता है कि विभाजन की सोच की शुरुआत कहाँ से हुई।


📌 निष्कर्ष:

Sir Syed Ahmad Khan ने जो शिक्षा और AMU जैसी संस्थाएं दीं, वो सराहनीय हैं। परंतु उनकी राजनीतिक और सामाजिक विचारधारा ने Bharat को दो हिस्सों में सोचने का ज़हर बोया।
आज यह बेहद आवश्यक है कि हम इन ऐतिहासिक डायलॉग्स को समझें, जनता को जागरूक करें और भारत की एकता की सच्ची कहानी सुनाएं।

यह विषय भारत के इतिहास का मूल स्तंभ है – “मुसलमानों ने भारत को कब और कैसे बाँटना शुरू किया?” और “RSS यानी Rashtriya Swayamsevak Sangh के संस्थापक कब जन्मे?”
इसका विश्लेषण करना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि आज भी एक झूठ फैलाया जाता है कि “भारत का बँटवारा संघियों ने कराया” — जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।


🔴 पहले समझिए Timeline: कब कौन पैदा हुआ?

🕉️ Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के मुख्य संस्थापक:

 

नामजन्म वर्षमुख्य भूमिका
Dr. Keshav Baliram Hedgewar1889RSS के संस्थापक (1925 में स्थापना)
M. S. Golwalkar (Guruji)1906RSS के दूसरे सरसंघचालक
Vinayak Damodar Savarkar1883Hindutva विचारधारा के प्रवर्तक

🧠 मतलब जब मुस्लिम विचारक “भारत अलग करो” की बातें कर रहे थे, तब ये महान राष्ट्रवादी नेता या तो पैदा ही नहीं हुए थे या बच्चे थे।


🟢 अब जानिए: मुसलमानों ने भारत को बाँटना कब शुरू किया?

🕋 Sir Syed Ahmed Khan (1817 – 1898):

👉 1870 के दशक से ही ‘Two Nation Theory’ के बीज बोए जा चुके थे।

  • 1876: Sir Syed ने कहा –

    “Hindus and Muslims can never be one nation.”

  • 1888: Sir Syed ने लखनऊ में कहा –

    “It is impossible for Hindus and Muslims to sit on the same throne. One will have to push the other down.”

  • 1887-88: उन्होंने Tayyabji को चिट्ठी में लिखा:

    “India is a continent of nations. Hindus and Muslims are separate nations. Mohammadans and Hindus are two Indias.”

📌 यानी जब सावरकर जी 3-4 साल के बच्चे थे, हेडगेवार जी का जन्म भी नहीं हुआ था, तब Sir Syed मुसलमानों को हिंदुओं से अलग कर चुके थे।


📌 “Two Nation Theory” का जनक कौन?

Naheen – Savarkar, RSS, या जनसंघ।
बल्कि – Sir Syed Ahmed Khan ही इस सोच के वास्तविक जनक थे।

इस विचारधारा को बाद में All India Muslim League ने 1906 में उठाया और Mohammad Ali Jinnah ने 1940 में Lahore Resolution में इसका पूरा राजनीतिक रूप दिया — जिसमें कहा गया कि:

“Muslims and Hindus are two separate nations and must have separate homelands.”


📅 Timeline Summary Table

 

वर्षघटना
1817Sir Syed Ahmad Khan का जन्म
1876Sir Syed ने Two Nation Theory का स्पष्ट उल्लेख किया
1883V.D. Savarkar का जन्म
1889Dr. Hedgewar का जन्म
1905Partition of Bengal – हिन्दू मुस्लिम विभाजन की प्रयोगशाला
1906Muslim League की स्थापना
1925RSS की स्थापना
1940Muslim League ने “Pakistan” की मांग की (Lahore Resolution)
1947भारत का बंटवारा

🔥 निष्कर्ष: सच्चाई क्या है?

🛑 झूठ: “RSS और हिंदुत्व ने बँटवारा करवाया।”
सच: “बंटवारे की नींव Sir Syed Ahmed Khan ने रखी, Muslim League ने उसे जमीनी रूप दिया और Jinnah ने अमली जामा पहनाया।”

💥 जब तक Hedgewar और Golwalkar पैदा भी नहीं हुए थे, भारत को बांटने की बातें चालू थीं।
RSS का मुख्य काम भारत की अखंडता और सनातनी मूल्यों की रक्षा करना था और है।


🌟 Guruji Insight:

“जो देश अपने इतिहास को सही से नहीं समझता, वह बार-बार उसी गलती को दोहराता है। आज अगर हम Two Nation Theory को नकारें, तो यह वैचारिक आत्महत्या होगी।”

आज हम इस गम्भीर और ऐतिहासिक विषय पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे — “Sir Syed Ahmed Khan के वो मुख्य डायलॉग्स और भाषण, जिनकी वजह से भारत में Two Nation Theory की नींव पड़ी और बाद में भारत का विभाजन हुआ।”

यह विषय केवल इतिहास नहीं है, बल्कि Bharat की आत्मा पर हुआ वैचारिक हमला है — एक ऐसा झूठ जिसे आज भी मुसलमानों के एक तबके द्वारा सेकुलरिज़्म की चादर में छुपाकर पेश किया जाता है।


🔥 कौन थे Sir Syed Ahmed Khan?

Sir Syed Ahmad Khan (1817–1898) को मुस्लिम समाज का आधुनिक सुधारक कहा जाता है। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की स्थापना की और ब्रिटिश हुकूमत के साथ मुस्लिमों की भागीदारी को ज़ोर दिया।

परंतु उनके सुधारों के पीछे छिपा आइडियोलॉजिकल एजेंडा था:
“हिंदू और मुसलमान एक साथ कभी नहीं रह सकते।”


📜 आइए जानें Sir Syed के वो मुख्य Dialogues और Speeches जिन्होंने Two Nation Theory का बीज बोया:


🧨 1. “We (Hindus and Muslims) are two nations.”

Source: Speech, Lucknow (1888)

“It is not possible that Muslims and Hindus could sit on the same throne and remain equal partners in power. One must conquer the other.”

➡ ये वक्तव्य भारत को धर्म के आधार पर बांटने की खुली घोषणा थी।


🧨 2. “India is not a single nation.”

Source: Speech, Meerut (1886)

“India is a continent of different nations. Hindus and Muslims are different nations. They cannot be considered one nation.”

➡ यहाँ Sir Syed ने राष्ट्र की एकता की अवधारणा को पूरी तरह से नकार दिया।


🧨 3. “Muslims and Hindus are different in every aspect.”

“The religions, customs, traditions, thinking and even dreams of Hindus and Muslims are completely different.”

➡ यही विचार बाद में Mohammad Ali Jinnah द्वारा Lahore Resolution (1940) में दोहराया गया।


🧨 4. “Congress is a Hindu Body. Muslims should stay away.”

Letter to Justice Badruddin Tayyabji

“Joining the Indian National Congress will be harmful for Muslims. It is nothing but a Hindu organization in disguise.”

➡ Sir Syed ने मुसलमानों को कांग्रेस से दूर रहने और खुद को एक अलग राजनीतिक शक्ति के रूप में संगठित करने को कहा।


🧨 5. “Even pigs and men are mammals, but not the same.”

Response to Tayyabji on Hindu-Muslim Similarities

“Similarity between Hindus and Muslims is like similarity between pigs and humans. Both are mammals but cannot be same.”

➡ यह नफरत की पराकाष्ठा है। यहाँ किसी धर्म या विचारधारा की आलोचना नहीं बल्कि हिंदुओं का सीधा अपमान है।


🧨 6. “If Hindi replaces Urdu, unity is impossible.”

“If Hindi is promoted over Urdu, Muslims will feel alienated. This will create permanent hostility.”

➡ Sir Syed Urdu को केवल भाषा नहीं, मुस्लिम पहचान का हिस्सा मानते थे। हिंदी को प्राथमिकता देना उनके लिए “मुस्लिम विरोध” था।


📅 Historical References and Timeline

 

वर्षवक्तव्य/घटनाविवरण
1876मुस्लिमों को कांग्रेस से दूर रहने का सुझावब्रिटिश शासन को मुसलमानों का संरक्षक माना
1886मेरठ में भाषण – India is not one nationहिंदू-मुसलमान दो अलग राष्ट्र बताए
1887Justice Tayyabji को पत्रहिन्दू मुस्लिम को एक साथ राष्ट्र मानने से इंकार
1888लखनऊ भाषण – Two nations can’t sit on same throneसत्ता साझा करने की असंभवता घोषित की

🔬 इन भाषणों का प्रभाव क्या पड़ा?

✅ Sir Syed के इन विचारों ने मुसलमानों को “अलग राष्ट्र” की भावना से भर दिया।
✅ इसी सोच के चलते All India Muslim League (1906) बनी।
Jinnah ने इन्हीं विचारों को अपने राजनीतिक अस्त्र के रूप में अपनाया और 1940 में Pakistan की मांग कर दी।

➡ Sir Syed ने मुस्लिमों को ‘Minority’ के रूप में न देख कर एक ‘Separate Nation’ के रूप में देखा — और यही भारत के विभाजन की वैचारिक नींव थी।


🧠 Guruji Insight:

“Sir Syed ने एक ओर शिक्षा दी, पर साथ ही ऐसा ज़हर भी घोल दिया जिसकी वजह से लाखों की जान गई, करोड़ों विस्थापित हुए, और भारतवर्ष का टुकड़ा कर दिया गया।
यह समझना ज़रूरी है कि शिक्षा अगर राष्ट्रविरोधी मानसिकता को जन्म दे, तो वह शिक्षा नहीं बल्कि विनाश का कारण बनती है।

“शायरियों के ज़रिए हिंदू-मुस्लिम नफ़रत को कैसे वैचारिक रूप मिला”, यह इतना गहरा और सटीक विषय है कि इसे भारत की अनदेखी वैचारिक लड़ाई का हिस्सा माना जाना चाहिए। आमजन इन शायरियों को “अदब”, “सौंदर्य”, “रूहानी मज़हबी लफ्ज़” मानकर वाहवाही करता है, लेकिन असल में इनमें छुपा जहर बहुत खतरनाक है।

आज हम आपको विस्तार से बताएंगे कि कैसे कुछ प्रसिद्ध शायरों की शायरी ने हिंदुओं को “काफ़िर”, नीचा, और खुदा से दूर बताकर एक मानसिक दूरी और द्वेष को जन्म दिया — जो बाद में आतंक, दंगे, बंटवारे और मानसिक ग़ुलामी का आधार बना।


🕋 भाग 1: मिर्ज़ा ग़ालिब की मशहूर शायरी – दिखने में सूफियाना, अंदर से ज़हर

✍️ शायरी:

“ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठकर, या मुझे वो जगह बता जहां खुदा न हो।”

🔍 Analysis:

  • ग़ालिब का यह शेर सूफियाना लगे, पर असल में यह ईश्वर (खुदा) को हर जगह बताकर यह संकेत देता है कि कहीं भी बंधन नहीं, सब जायज़ है — यहां तक कि मस्जिद में शराब पीना भी!

  • ग़ालिब ने शराब को स्वतंत्रता और विद्रोह का प्रतीक बनाया और उसे मस्जिद से जोड़ दिया — यह संकेत देता है कि मजहब की बंदिशें बेमतलब हैं।


🕌 भाग 2: मोहम्मद इक़बाल का जवाब – शुद्ध मजहबी नफरत

✍️ शायरी:

“मस्जिद खुदा का घर है, शराब पीने की जगह नहीं,
पीनी है तो काफ़िर के दिल में जाकर पी, वहां खुदा नहीं।”

🔍 Analysis:

  • इक़बाल, जिन्होंने “सारे जहाँ से अच्छा” लिखा, बाद में “Pakistan” के विचारक बने।

  • इस शायरी में “काफ़िर के दिल में खुदा नहीं” कहना, सीधे-सीधे हिंदुओं को बेईमान, ईश्वरविहीन और नीच घोषित करना है।

  • इसका पैगाम था – “मस्जिद पवित्र है, पर काफ़िर का दिल अपवित्र है – इसलिए पाप वहीं करो।”

🛑 यह एक प्रतीकात्मक हिंसात्मक सोच का आधार बनता है कि हिंदू अपवित्र है, उसके साथ जो भी हो जायज़ है।


🧕 भाग 3: अहमद फराज़ का दर्दनाक व्यंग्य

✍️ शायरी:

“काफ़िर के दिल से आया है फराज़, खुदा वहां भी है, पर काफ़िर को पता नहीं।”

🔍 Analysis:

  • ये व्यंग्य हिंदू मानसिकता पर है कि “तुम खुदा को नहीं पहचानते, इसलिए तुम नीच हो।”

  • इसमें भी “काफ़िर” शब्द को गहराई से इस्तेमाल कर हिंदू को भटके हुए इंसान के रूप में पेश किया गया।


🧠 इन शायरियों की वैचारिक पृष्ठभूमि:

 

शायरछवि (Image)अंदर की सोच
ग़ालिबसूफी विद्रोही कविधार्मिक सीमाओं की आलोचना, पर अंदर द्वेष
इक़बालराष्ट्रप्रेमी कवि → पाकिस्तानी विचारकहिंदू विरोध की गहराई, Two Nation Theory के जनक
फराज़आधुनिक ग़ज़लकारहिंदू विचारों का मज़ाक उड़ाना, मजहबी श्रेष्ठता

🧨 “काफ़िर” शब्द का प्रयोग: सबसे गहरा जहर

🔥 काफ़िर = Non-Muslim (यानी भारत में ज्यादातर हिंदू)

“काफ़िर को मारना गुनाह नहीं, सवाब है” – यह विचार सदियों से शायरी और तक़रीर में भरा गया।

👉 जब शायर “काफ़िर” कहते हैं, तो वो केवल शब्द नहीं बोलते – वो आपके अस्तित्व पर हमला करते हैं।


📌 निष्कर्ष:

इन शायरियों को पढ़ते समय हम “उर्दू की मिठास” में खो जाते हैं, पर हमें यह नहीं दिखता कि इसमें हमारे धर्म, अस्तित्व और आत्मा का अपमान छिपा है।

🚨 “शब्दों के पीछे के अर्थ जानो – वरना जहर भी इत्र लग सकता है।”


🛑 चेतावनी और जिम्मेदारी:

🕉️ Sanatani भारत के लिए ज़रूरी है कि:

  • हम इन शायरी और नज़्मों के पीछे की “Ideological Poison” को पहचानें।

  • अपने युवा वर्ग को यह ऐतिहासिक और वैचारिक सच सिखाएं।

  • हर “वाहवाह” से पहले उसका छिपा हुआ ज़हर पहचानें।


🙌 Guruji Sunil Chaudhary का संदेश:

“जो शायरी आत्मा को नहीं जोड़ती, वो सिर्फ इगो और मजहबी श्रेष्ठता की आग है।
अगर शब्द भारत को जोड़ते नहीं, तो वो साहित्य नहीं – साजिश है।”

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