सेक्स एक ऐसा विषय है जिसे अक्सर भारतीय समाज में वर्जित माना जाता है। परंतु, यह हमारी प्रकृति, इतिहास, वेदों, और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। यह लेख आपको सेक्स के प्रति भारतीय दृष्टिकोण को समझने, इतिहास में इसके महत्व को जानने और इसे वर्जित समझने की गलतफहमी को दूर करने में मदद करेगा।

सेक्स और भारतीय संस्कृति का इतिहास
भारत के इतिहास में सेक्स को पवित्र और स्वाभाविक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार किया गया है।
- प्राचीन मंदिर और मूर्तियां:
खजुराहो के मंदिर, अजन्ता-एलोरा की गुफाएं, और कोणार्क का सूर्य मंदिर, इन सभी में कामुक मूर्तियों और कलाकृतियों का निर्माण किया गया है। ये दर्शाते हैं कि सेक्स को एक सहज और सम्मानित दृष्टि से देखा गया था। - पुराण और महाकाव्य:
महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों में काम और प्रेम का गहराई से वर्णन किया गया है।- कामदेव को भारतीय संस्कृति में प्रेम और यौनिकता का देवता माना गया है।
- रति, कामदेव की पत्नी, यौनिकता और आकर्षण की प्रतीक हैं।
वेदों और शास्त्रों में सेक्स का उल्लेख
ऋग्वेद और यजुर्वेद:
- इन वेदों में सेक्स को जीवन का आवश्यक हिस्सा माना गया है।
- यौन संबंधों का उल्लेख करते हुए इसे प्रजनन और आत्मिक सुख का माध्यम बताया गया है।
कामसूत्र:
महर्षि वात्स्यायन द्वारा लिखित कामसूत्र सिर्फ यौन क्रिया की पुस्तक नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला सिखाने वाली एक महान ग्रंथ है।
- इसमें प्रेम, यौन क्रिया, जीवन के विभिन्न आयामों और सामाजिक संबंधों का गहराई से वर्णन है।
- कामसूत्र यह सिखाता है कि यौनिकता एक कला है, जो मानसिक और शारीरिक आनंद प्रदान करती है।
प्राचीन स्मारकों में सेक्स की अभिव्यक्ति
- खजुराहो के मंदिर:
यहां की मूर्तियां कामुकता और प्रेम की कहानियों को दर्शाती हैं। ये मूर्तियां यह दर्शाती हैं कि सेक्स समाज में खुली चर्चा का विषय था। - कोणार्क का सूर्य मंदिर:
यह मंदिर भी यौनिकता की गहराई को समझाने वाले चित्रणों से सजाया गया है। - अजन्ता और एलोरा:
यहां के चित्रण भारतीय संस्कृति की गहराई और कामुकता के प्रति उनके सहज दृष्टिकोण को दिखाते हैं।
सेक्स: एक क्रिया या पवित्र अनुष्ठान?
ओशो रजनीश का दृष्टिकोण:
- ओशो ने कहा कि सेक्स कोई अपराध नहीं, बल्कि जीवन का एक स्वाभाविक और पवित्र हिस्सा है।
- सेक्स को उन्होंने ध्यान और आत्मिक आनंद का माध्यम बताया।
गांधीजी और सेक्स:
- गांधीजी ने कहा कि सेक्स संयम और अनुशासन के साथ किया जाना चाहिए।
- उन्होंने इसे प्रजनन और समाज में स्थिरता लाने का माध्यम बताया।
सेक्स शिक्षा का महत्व
आज के समय में सेक्स को वर्जित मानने के कारण यौन शिक्षा की कमी है, जो समाज में अपराध और असुरक्षा को बढ़ावा देती है।
यौन शिक्षा के लाभ:
- सुरक्षित यौन संबंध:
इससे लोग सुरक्षित और स्वस्थ यौन संबंध बना सकते हैं। - अज्ञानता से बचाव:
गलत धारणाओं और भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है। - सहमति (Consent) का महत्व:
इससे लोग सहमति और निजी सीमाओं का सम्मान करना सीखते हैं।
सेक्स के प्रति समाज का दोगलापन
दिखावा और वास्तविकता:
- समाज में कई लोग सार्वजनिक रूप से सेक्स को वर्जित मानते हैं, लेकिन निजी जीवन में इसका हिस्सा होते हैं।
- पोर्नोग्राफी देखने वाले वही लोग होते हैं, जो सेक्स की चर्चा पर आलोचना करते हैं।
सेक्स को वर्जित क्यों माना जाता है?
- धार्मिक भ्रांतियां:
कई बार धर्म और समाज ने सेक्स को अपराध जैसा दर्शाया है। - पश्चिमी प्रभाव:
ब्रिटिश शासन के समय सेक्स पर खुले विचारों को दबाया गया। - शिक्षा की कमी:
यौन शिक्षा न होने से इसे एक गुप्त विषय बना दिया गया।
सेक्स और भारतीय समाज का भविष्य
- आज की पीढ़ी सेक्स के प्रति अधिक खुली है।
- यौन शिक्षा को स्कूलों और परिवारों में शामिल किया जा रहा है।
- फिल्मों, पुस्तकों और वेब सीरीज ने इस विषय पर चर्चा को सामान्य बना दिया है।
निष्कर्ष: सेक्स को सामान्य बनाना जरूरी है
सेक्स कोई अपराध नहीं है। यह जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है।
- भारतीय इतिहास, वेद, और स्मारक यह सिद्ध करते हैं कि सेक्स को पवित्र और स्वाभाविक माना गया है।
- इसे वर्जित मानने की बजाय, इस पर खुलकर और स्वस्थ चर्चा करनी चाहिए।
💡 याद रखें:
सेक्स पर सकारात्मक दृष्टिकोण न केवल समाज को शिक्षित करेगा, बल्कि उसे अधिक सुरक्षित और प्रगतिशील भी बनाएगा।











